क्या है समान नागरिक संहिता, जाने कितनी बदल जाएगी महिलाओं की जिंदगी

जनादेश/नई दिल्ली: देश में जल्द ही समान नागरिक संहिता लागू करने की बात की जा रही है। समान नागरिक संहिता का मसला देश के लिए नया नहीं है। यह प्रस्तावित कानून शादी, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलो पर देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की बात करता है। अगर यह लागू होता है तो सभी धर्म की महिलाओं को शादी से लेकर तलाक और उत्तराधिकार के मामले में ज्यादा अधिकार मिलेगा। आपको बता दे कि फिलहाल देश में 7 तरह के सिविल कानून प्रचलन में हैं। जिन्हें अलग-अलग समय में बनाया गया था। ये कानून अलग-अलग धर्मों पर लागू होते हैं। हिंदू, बौद्ध और जैनियों के शादी, तलाक आदि ‘हिंदू विवाह अधिनियम-1955’ और उत्तराधिकार ‘हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम-1956’ के तहत तय होता है।

मुसलमानों में शादी, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मसले ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ-1937’ के अंतर्गत शरीअत कानूनों से तय होते हैं। वहीं ईसाइयों के लिए 1872 में बना कानून, तो पारसियों के लिए 1936 में बना एक कानून लागू होता है। सिखों के लिए ‘आनंद विवाह अधिनियम 2012 का प्राविधान है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में वकील गोविंद बाली बताते हैं कि ‘समान नागरिक संहिता से महिलाओं के अधिकारों में थोड़ी बढ़ोतरी होगी, लेकिन दूसरी ओर धर्म के पालन करने जैसे अधिकार पर खतरा हो सकता है। इसके अलावा देश के कई जनजातीय समुदायों में शादी-ब्याह को लेकर उनकी अपनी पद्धति है। ऐसे में सबको एक कानून के तहत लाना मुश्किल काम है। आम तौर से मुस्लिमों का केस कोई मुस्लिम वकील या शरीअत का जानकार ही ले पाता है। दरअसल एक ही विषय पर धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून होते के चलते कई बार आस्था और कानून में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

शरीअत के अनुसार शादी की न्यूनतम उम्र 15 साल होती है, जबकि ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम-2006’ के मुताबिक 18 साल से कम उम्र की लड़की से शादी करना और उससे शारीरिक संबंध बनाया अपराध है। आपको बता दे कि शरीअत के मुताबिक मुसलमान पुरुषों को 4 शादियां करने का अधिकार होता है, जबकि पहली पत्नी के रहते बाकी धर्मों के पुरुष ऐसा नहीं कर सकते। पारसी विवाह और तलाक अधिनियम के मुताबिक दूसरे धर्म के पुरुषों से शादी करने वाली महिलाएं पारसी धर्म पालन करने के अधिकार से वंचित हो जाती हैं, जबकि भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को अपना धर्म चुनने और उसके पालन का अधिकार देता है।