हिंसा: जानें किसने रची थी रामनवमी के जुलूस पर पथराव की साजिश

जनादेश/गांधीनगर: 10 अप्रैल को रामनवमी के मौके पर गुजरात के तीन जिलों हिम्मतनगर, खंभात और द्वारका में दो समुदाय के बीच दंगे हुए थे। खंभात में हुई हिंसा में तीन स्थानीय मौलवियों के नाम सामने आए है। खंभात पुलिस के मुताबिक दंगे की साजिश खंभात के ही तीन मौलवियों और दो अन्य लोगों ने रची थी। पुलिस ने तीनों मौलवियों सहित अब तक 9 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, अन्य लोगों की तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार दंगे की साजिश को अंजाम देने के लिए मौलवियों ने खंभात के बाहर से लोगों को बुलाया था, जिससे कि उनकी पहचान न हो सके। वहीं, जुलूस के एक दिन पहले ही खेतों के पास पत्थर जमा किए गए थे। जुलूस पर पत्थर कहां से फेंकना है, यह भी पहले से ही तय था।

रामनवमी के मौके पर खंभात शहर के शंकरपुरा क्षेत्र के रामजी मंदिर से रविवार शाम चार बजे डीजे के साथ जुलूस निकाला गया था। जुलूस में तीन हजार से अधिक श्रद्धालु जमा थे। जुलूस तीन द्वारों चितरी बाजार, पीठ बाजार, मंडई चौकी क्षेत्र से होकर गुजरना था। हालांकि शंकरपुरा क्षेत्र से निकलने के बाद जुलूस कुछ ही दूर पहुंचा था कि तभी बबूल के खेतों से कुछ दंगाइयों ने अचानक जुलूस पर पथराव शुरू कर दिया था। इसके बाद जुलूस में शामिल लोगों में भगदड़ मच गई। इसके बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया था।

इसके बाद कुछ दंगाइयों ने शहर के छगडोल मैदान और सरदार टावर पर पहुंचकर तोड़फोड़ व आगजनी शुरू कर दी थी। कई लॉरियों और दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया गया था। इसी तरह राजपूत वाडा के पास एक घर में भी आग लगा दी थी। घटना के बाद पुलिस काफिला मौके पर पहुंचा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और हल्का बल-प्रयोग भी किया। इसमें करीब 15 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। वहीं, एक बुजुर्ग की मौत हो गई।