उत्तराखंड: आज से शुरू होगी 7 किमी लंबी हरियाली कांठा यात्रा

जनादेश/देहरादून: हरियाली देवी की सात किमी लंबी हरियाली कांठा यात्रा 22 अक्तूबर से शुरू हो रही है। यह उत्तराखंड की पहली ऐसी यात्रा है जो रात के अंधेरे में शुरू होती है। पूरी रात श्रद्धालु घने जंगल के बीच से गुजरते हुए अगली सुबह सूर्य की किरण के साथ कांठा मंदिर में प्रवेश करते हैं। मगर आज भी यह यात्रा गुमनाम है। इस प्राचीन यात्रा के प्रचार-प्रसार के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं।


अगस्त्यमुनि ब्लॉक के रानीगढ़ पट्टी के सिद्धपीठ हरियाली देवी मंदिर से हरियाली कांठा के लिए प्रतिवर्ष धनतेरस की रात को यात्रा का आयोजन होता है। सात किमी लंबी इस यात्रा में मां भगवती हरियाली देवी अपनी सुसराल जसोली से अपने मायके हरियाली कांठा के लिए प्रस्थान करती हैं। भक्तों के जयकारों के बीच रातभर यात्रा का संचालन होता है। इस दौरान मां भगवती भक्तों के साथ कोदिमा, बासों, पंचरंग्या और कनखेल्या में अल्प विश्राम करती हैं और अगली सुबह सूरज की पहली किरण के आगमन के साथ ही अपने मायके मंदिर हरियाली कांठा में प्रवेश करती हैं। मान्यता है कि यह यात्रा दीपावली के पावन पर्व पर अपनी विवाहिता बेटी को ससुराल से मायके बुलाने की परंपरा है। हरियाला कांठा मंदिर से थोड़ा पहले ही मायके पक्ष पाबौ गांव के ग्रामीण यात्रा का स्वागत करते हैं और अपनी आराध्य की डोली को कंधों पर रखकर मंदिर में पहुंचते हैं। इस मौके पर पूरा क्षेत्र देवी के जयकारों से गुंजायमान हो जाता है। ग्राम प्रधान अर्चना चमोली, पुजारी विनोद प्रसाद, बल्लभ प्रसाद जसोला, जगत सिंह जंगली, नारायण सिंह आदि का कहना है कि मां हरियाली की जसोली से कांठा की यात्रा सदियों पुरानी है लेकिन आज तक इसे वह पहचान नहीं मिल पाई है, जिसकी वह हकदार है।