उत्तर प्रदेश: सरसों तेल-रिफाइंड ऑयल के दाम में एक बार फिर आई तेजी

जनादेश/लखनऊ: रूस, इंडोनेशिया आदि देशों से होने वाली आपूर्ति बाधित होने और डिमांड अधिक माल कम होने की वजह से खाद्य तेल के दाम एक बार फिर से उबलने लगे हैं। सरसों का तेल 185 और फार्रच्यून 180 रुपये लीटर पहुंच गया है। दोनों तेलों में दस से पंद्रह रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। कारोबारी कह रहे हैं कि कंपनियों ने काफी पैसे बढ़ा दिया है जिसके कारण एमआरपी काफी तेज हो गई है। फुटकर से लेकर थोक दामों में लगातार वृद्धि जारी है। करीब महीनेभर से कीमतों में उछाल बना हुआ है।

रूस और यूक्रेन युद्ध का असर सोयाबीन तेल पर पड़ रहा है। रिफाइंड आयल काफी महंगा हो गया है। वहीं सरसों का तेल भी दस से पंद्रह रुपये लीटर महंगा हो चुका है। कंपनियां हर हफ्ते रेट बढ़ा रही हैं। एमआरपी में मनमानी कर रही हैं। इसके चलते तेजी बनी हुई है।

विदेशों से आने वाले रिफाइंड तेल की आपूर्ति रुक गई है। सोयाबीन का तेल महंगा है। खासतौर पर रिफाइंड आयल बहुत चढ़ चुका है। सरसों की फसल आने वाली एकदम से तेल की कीमतें धड़ाम से गिरेंगी।

सभी प्रकार के खाद्य तेलों में फिर से तेजी है। बिना बताए आए दिन कंपनियां रेट बढ़ा रही हैं। एक लाट बिकी नहीं कि दूसरी पर एमआरपी में अंतर आ जाता है। ग्राहक सुनने को तैयार नहीं हैं। कंपनियों पर अब सरकार को सीधी नकेल कसनी ही होगी। बीते साल सौ से सवा सौ रुपये लीटर तेल बिक रहा था। बीते एक से डेढ़ साल में बड़ा अंतर आ चुका है। नई सरसों आने वाली है। फसल अच्छी है। अगले माह में अचानक सरसाें के तेल में बड़ा अंतर आएगा।