प्रीपेड मीटर न लगाने पर अड़ा पंजाब

जनादेश/चंडीगढ़: प्रीपेड मीटरों को लेकर केंद्र सरकार और पंजाब सरकार आमने-सामने है। केंद्र की चेतावनी के बाद भी पंजाब ने प्रीपेड मीटर लगाने से मना कर दिया है। राज्य सरकार ने कहा है कि वह लोगों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाएगी। पंजाब की ओर से कहा गया है कि केंद्र द्वारा दिए गए समय में इतनी बड़ी संख्या में मीटर लगाना संभव नहीं है।

पंजाब में हर साल लगभग 1200 करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है। राज्यों में बिजली चोरी के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र की ओर से प्रीपेड मीटर लगाने के लिए दिए जा रहे हैं। पंजाब को भी केंद्र की ओर से 85 हजार मीटर उपलब्ध कराए गए हैं। केंद्र की ओर से कहा गया है कि तीन महीने में यह मीटर लगाए जाने हैं। यदि पंजाब दिए गए समय में मीटर नहीं लगाता है तो राज्य के बिजली सुधार फंड रोक दिए जाएंगे। केंद्र की इस चेतावनी के बाद पंजाब ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया है। पंजाब के बिजली मंत्री हरभजन सिंह ने साफ कर दिया है कि वह केंद्र द्वारा दिए गए मीटरों को राज्य में नहीं लगाएंगे। उनके स्थान पर सूबे में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। प्रीपेड मीटर लगाने से सरकार की मुफ्त बिजली योजना में रुकावट आएगी। इसके कारण सरकार केंद्र की इस योजना से पल्ला झाड़ने में लगी हुई है।

प्रीपेड मीटर के ये होंगे फायदे
केंद्र द्वारा दिए जाने वाले प्रीपेड मीटर मोबाइल की तरह से रिचार्ज किए जा सकेंगे। उपभोक्ता इन मीटरों के लगने के बाद अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली का रिचार्ज करवा सकेंगे। इसमें बिजली चोरी के साथ ही मीटर रीडिंग का भी झंझट नहीं होगा।

स्मार्ट मीटर से ये होगा नुकसान
आम या स्मार्ट मीटर के कुछ ऐसे नुकसान हैं जो लोगों की जेब ढीली करेंगे। घरों में स्मार्ट मीटर लगने के बाद यदि आप बिजली का इस्तेमाल नहीं भी करते हैं तो कुछ ऐसे खर्चे हैं जिनका भुगतान आपको अनिवार्य रूप से ही करना पड़ेगा।