गुजरात में कद्दू की खेती करने वाले किसानों को कोरोना की मार

गुजरात/ मकसूद कारीगर: किसानों को “जगत का तात” का खिताब दिया गया है। किसान दुनिया भर में अन्न की आवश्यकता को पूरा करता है। लेकिन किसी को परवाह नहीं है कि किसान की हालत क्या है ठीक है या नहीं। किसान ना धूप देखता है ना छाँव कड़ी महेनत करता है लेकिन आखिर में कई मुसीबतों का करना पड़ता है।

कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन को सख्ती से लागू किया जा रहा है, इसलिए किसान अपनी उपज बेचने के लिए सही अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई मांगो के बाद मार्केट यार्ड शुरू किए गए हैं लेकिन किसानों को कई तरह की कठिनाइयों और विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कभी भारी बारिश, कभी सूखा, कभी कभी प्राकृतिक आपदाएँ। खेड़ा जिले के कपडवंज तहसील के किसान इस तरह की नई आपदा का सामना कर रहे हैं।

कपडवंज तहसील के आसपास कई गाँवों जैसे जंडा, अंबवेल, मोटाजेर, व्यास वासणा , अलवा हीरापुरा, भोजाना मुवाड़ा, शिहोरा, नरसिह पुर में किसानों की कद्दू की फसल पर तबाही हुई है। कद्दू का उत्पादन बड़ी मात्रा हुआ है । लेकिन इसकी बिक्री और मांग अहमदाबाद, वडोदरा जैसे खेड़ा जिले जैसे अन्य जिलों में अधिक है। जबकि खेड़ा जिले में मांग बिलकुल ना के बराबर है और किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

चूंकि जिले के बाहर बेचने की अनुमति नहीं है, किसानों के पास केवल दो विकल्प हैं, या तो मुफ्त में बेचना या मवेशियों को खिलाना या फिर ऐसी है सड़ने के लिए छोड़ देना। किसानो की मांग है कि उन्हें लोकडाउन के नियमों के अनुसार अन्य जिलों में कद्दू की फसल बेचने की अनुमति प्रशासन की ओर से दी जाए ताकि होने वाले नुकसान से कुछ नाछ मिल पाए और अपने परिवार का गुजरान कर सके।