विडंबनाः चिलचिलाती धूप में सड़क किनारे प्रवासी मजदूर ने दिया बच्ची को जन्म

पैदल गांव जा रही गर्भवती ने सड़क पर दिया बच्ची को जन्म, दो घंटे बाद फिर शुरू किया सफर

भोपालः कोरोना के कहर के कारण के कारण देश में लॉकडाउन है। लेकिन सड़कें फिर भी सूनी नही है।सड़कों पर प्रवासी मजदूर मिलों पैदल सफर कर अपने घर जा रहे हैं। इन मजदूरों की मजबूरी को कोई नही समझ सकता, कोई चार दिन से चला आ रहा है तो किसी ने न जाने कितने किलोमीटर का सफर तय किया और शहर से पैदल गांव लौट रहे है। इन्हीं प्रवासियों में से एक गर्भवती महिला ने चिलचिलाती धूप में सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। अभी बच्चा होने की खुशी ढंग से मनी भी नहीं थी कि महिला प्रसव के 2 घंटे बाद ही बच्चे को लेकर पैदल चलने लगी।

घटना मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की है। यहां लॉकडाउन  में नासिक से 30 किलोमीटर पहले से पैदल चल कर कर आ रही दो मजदूरों की पत्नियां गर्भवती थी। जिसमें से एक महिला शकुंतला ने महाराष्ट्र के पीपरी गांव में बच्चे को जन्म दे दिया। सड़क किनारे ही साथ चल रही महिलाओं ने साड़ी की आड़ कर महिला का प्रसव कराया। बिना हॉस्पिटल जाए, बगैर जच्चा-बच्चा के चेकअप और बगैर किसी डॉक्टर को मिले बच्चे के जन्म के बाद महिला फिर भूखे-प्यासे ही पैदल सफर पर चल दी।

यह परिवार पैदल चलते हुए रविवार को मध्य प्रदेश के सेंधवा पहुंचे। इसके साथ में चल रहे अन्य मजदूर की पत्नी 8 माह के गर्भ से थी लेकिन इस चिलचिलाती धूप में अपने सफर को जारी रखे हुए थी. पैदल चलते-चलते आखिर यह सेंधवा पंहुच गए। इन सभी को सतना जाना है। मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र के बॉर्डर पर ग्रामीण थाना प्रभारी की नजर उन पर पड़ी। इन लोगों से बातचीत और इनका दर्द को समझने के बाद उच्च अधिकारियों से बात कर इन्हें क्वारनटीन सेंटर लाया गया। बाद में दोनों महिलाओं को सेंधवा के शासकीय हॉस्पिटल में दिखाया गया।

महिला के पति राकेश ने बताया कि हम नासिक  से 30 किलोमीटर दूर रहते थे. वहां से आ रहे हैं और एमपी के सतना जिले में पैदल जा रहे हैं। महिला 8 महीने की प्रेग्नेंट थी लेकिन उसने अपना सफर नही रोका महिला के पति ने बाताया कि पैदल चलते चलते ही मेरी पत्नी की पीपरी गांव तक पहुंचते ही डिलीवरी हो गई। वहां 2 घंटे रूके और फिर पैदल चल दिए।