प्रसपा अध्यक्ष ने दिए राजनीति में बड़े संकेत

जनादेश/नोएडा: प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने राजनीति में बड़े संकेत दिए हैं। शिवपाल सिंह यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्विटर पर फॉलो कर लिया है। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी फॉलो किया है। शिवपाल सिंह यादव ने पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को भी फॉलो किया है। इससे पहले शिवपाल सिंह यादव पीएम और सीएमओ को ही फॉलो करते थे। शिपवाल सिंह यादव अब इन नेताओं को पर्सनली फॉलो कर रहे हैं।

शिवपाल सिंह यादव के इस कदम से एक बार फिर से राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इससे पहले, चर्चा थी कि शिवपाल यादव ने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुकाकात की थी, उसके बाद शिवपाल यादव बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे। सूत्र बताते हैं कि इटावा से दिल्ली जाने के दौरान शिवपाल ने पूर्व विधायक हरिओम यादव से भी मुलाकात की थी।इससे पहले, विधानसभा में विधायक पद की शपथ लेने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। उन्होंने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया था। यह भी कहा कि वक्त आने पर बोलेंगे।

शिवपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट हुई है। भविष्य के फैसले पर कहा कि वक्त आने पर इसका खुलासा करेंगे। शिवपाल के इस रहस्यमयी बयान से सियासी हलके में चर्चा का दौर शुरू हो गया। सूत्र बताते हैं कि इटावा से दिल्ली जाने के दौरान शिवपाल ने पूर्व विधायक हरिओम यादव से भी मुलाकात की थी। हरिओम रिश्ते में उनके समधी हैं और सपा से नाता तोड़कर भाजपा में चले गए हैं। सियासी गलियारे में इस मुलाकात को भविष्य में होने वाले विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल इस हलचल के बीच भाजपा और सपा के नेता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

लगातार उपेक्षा का आरोप
सपा के साथ गठबंधन करने के बाद शिवपाल को उम्मीद थी कि उनकी पार्टी के नेताओं को भी टिकट मिलेगा। उन्होंने करीब 25 नेताओं की सूची अखिलेश यादव को सौंपी। यह कहा कि जो भी जिताऊ हों, उन्हें टिकट दे दें। लेकिन सपा ने सिर्फ उन्हें ही टिकट दिया। ऐसे में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रसपा के कई नेता दूसरे दलों में चले गए। लेकिन, ज्यादातर उनके साथ जुड़कर चुनाव अभियान में उतरे। इसके बाद भी विधायक मंडल दल की बैठक में नहीं बुलाए जाने को वे अपनी उपेक्षा के तौर देख रहे हैं।