हनुमान जन्‍मोत्‍सव के रंग में डूबी जनता, मंदिरों में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

जनादेश/लखनऊ: शनिवार को लखनऊ समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सो में बड़े ही धूमधाम से हनुमान जन्‍मोत्‍सव मनाया गया। पूरे प्रदेश में हनुमान जयंती का पर्व हर्षोल्लास के साथ मना। चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को चित्रा नक्षत्र में माता अंजना के गर्भ से बजरंग बली ने जन्म लिया था। हनुमत जन्मोत्सव पर इस बार शनिवार का विशेष फलदायी संयोग बना है। सुबह से ही मंदिरों में भक्‍तों की भीड़ जमा हो गई थी। लोगों अपनी अपनी श्रृद्धा से पवनपुत्र हनुमान की पूजन अर्चना की । कहीं पदयात्रा निकाली गई तो कहीं सुंदरकाण्‍ड और रामायण का पाठ किया गया। इसके साथ ही लखनऊ में हनुमान सेतु मंदिर में दाेपहर 12 बजे विशेष आरती की गई।

हनुमान सेतु मंदिर के आचार्य चंद्रकांत द्विवेदी ने बताया कि हनुमान जयंती साल में एक बार नहीं दो बार मनाई जाती है। यह सही बात है। रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था। तो दूसरा जन्मदिन चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। अब हम आपको इस खबर के जरिए इसकी कहानी बताने जा रहे हैं- 

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को हुआ था। उस दिन मंगलवार था, मेष लग्न और स्वाती नक्षत्र था। इसी तिथि का वर्णन गीताप्रेस गोरखपुर की व्रत-पर्वोत्सव किताब में भी मिलता है। तथ्यों के संबंध में वाल्मीकि रामायण को सबसे प्रमाणिक ग्रंथ माना गया है। इसलिए हनुमानजी की जन्म तिथि यही सटीक मालूम होती है।

चैत्र माह की पूर्णिमा पर हनुमान जयंती मनाने के पीछे एक कथा है। एक बार हनुमान जी ने सूर्य को गेंद समझकर निगल लिया था, उस समय इंद्र भगवान ने अपने वज्र से उन पर प्रहार किया, जो हनुमान जी की ठोड़ी में जाकर लगा। इस वजह से हनुमान जी अचेत हो गए थे। इससे क्रोधित होकर पवनदेव ने संसार की प्राण वायु रोक दी थी। बाद में हनुमानजी को होश आया तो देवताओं के आग्रह पर पवनदेव ने भी वायु प्रवाह का अवरोध खत्म कर दिया था। इसके बाद हनुमानजी को सभी देवताओं ने अनेक वरदान दिए। उस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा थी। इसी घटना की वजह से चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्मदिन मनाया जाने लगा।