अब हिंदी में भी मिलेंगी MBBS की किताबें

जनादेश/मध्य्प्रदेश: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मध्य प्रदेश सरकार की हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत से एक दिन पहले शनिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कई छात्र मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती है।

बता दे कि एमपी के सीएम शिवराज सिंह खुद को राज्य के सभी छात्रों और बच्चों का मामा बताते हैं। अक्सर छात्रों के साथ उनके रोचक संवाद और बयान वायरल होते रहते हैं। इस बार उन्होंने अपने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘डॉक्टर पर्ची के ऊपर ‘Rx’ के स्थान पर ‘श्री हरि’ लिख सकते हैं और फिर दवाओं आदि की सूची हिंदी में लिख सकते हैं।’ आगे शिवराज सिंह चौहान ने ये भी कहा है कि देश में हिन्दी में मेडिकल की शिक्षा देने वाला मध्य देश देश का पहला राज्य बन रहा है। इसी के साथ शाह रविवार को भोपाल में मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में एक कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश में हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई की शुरूआत करेंगे। इस मौके पर वह MBBS प्रथम वर्ष की हिंदी पुस्तकों का विमोचन भी करेंगे। चौहान ने चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित ‘हिन्दी की व्यापकता एक विमर्श’ कार्यक्रम को यहां संबोधित करते हुए कहा, ‘यहां गांव-गांव में डॉक्टर की जरूरत है, हिंदी में लिखेंगे, इसमें क्या दिक्कत है?

हालांकि दवाई का नाम क्रोसिन लिखना है तो क्रोसिन हिंदी में भी लिखा जा सकता है. उसमें क्या दिक्कत है? ऊपर श्री हरि लिखो…… और क्रोसिन लिख दो। आरएक्स के स्थान पर श्री हरि. यहां डॉक्टर मित्र बैठे हैं वो तरीके निकालेंगे.’ उन्होंने कहा कि मैंने एक बच्चे को इसलिए मेडिकल कॉलेज छोड़ते हुए देखा क्योंकि उसे अंग्रेजी नहीं आती थी। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हिन्दी माध्यम की शिक्षा कई विद्यार्थियों के जीवन में नया प्रकाश लेकर आयेगी। हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई के साथ एक नया युग शुरू हो रहा है। यह एक सामाजिक क्रांति है। गरीब परिवार का बेटा भी मेडिकल की पढ़ाई के बारे में सोच सकेगा।’

चौहान ने कहा कि प्रदेश में मातृ-भाषा हिन्दी में अध्ययन और अध्यापन को प्रोत्साहित करने और हिन्दी के लिए गर्व की अनुभूति उत्पन्न कराने के उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संकल्प व्यक्त किया गया है कि शिक्षा का माध्यम मातृ-भाषा हो, नई शिक्षा नीति में भी इस भावना का प्रकटीकरण हुआ है।  साथ ही अंग्रेजी के सरल और चलन में आ चुके शब्दों के देवनागरी लिपि में अधिक से अधिक उपयोग से मेडिकल और तकनीकी शिक्षा की पढ़ाई विद्यार्थियों के लिए सरल होगी। उन्होंने कहा कि हिन्दी को लेकर मानसिकता बदलने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हिन्दी का संपूर्ण विश्व में सम्मान है। मैंने सभी विदेश यात्राओं में अपनी मातृ-भाषा हिन्दी में ही संबोधन दिए हैं, सभी जगह हिन्दी को सम्मान से सुना जाता है। राज्य सरकार द्वारा मातृ-भाषा हिन्दी में पढ़ाई का विस्तार इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक, नर्सिंग और पैरामेडिकल में भी किया जाएगा।’