अब बच्चों की संपत्ति में बुजुर्ग अभिभावकों को मिलेंगे कानूनी अधिकार!

जनादेश/डेस्क: समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित विशेषज्ञ कमेटी को भेजे गए सुझावों में कई लोगों ने, बच्चों की प्रॉपर्टी में बुजुर्ग अभिभावकों को हक देने के लिए रिवर्स इनहेरिटेंस कानून बनाने की मांग की है। बता दे कि कुछ क्षेत्रों में हिंदू मैरिज ऐक्ट में भी संशोधन की मांग की गई है। इस बीच कमेटी को सुझाव देने के लिए तय समय सीमा अब समाप्त हो गई है। उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने प्रस्तावित ड्राफ्ट को लेकर बीती सात सितंबर से उत्तराखंड की जनता से सुझाव मांगे थे। इसके साथ ही कमेटी के सदस्य, उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों से संवाद भी कर रहे हैं। कमेटी अब तक माणा से लेकर मुनस्यारी, धारचुला तक लोगों से संवाद कर चुकी है। इस दौरान लोगों ने समान नागरिक संहिता में महिलाओं के साथ ही बुजुर्गों के अधिकारों को भी मजबूत करने की मांग की है।

हालांकि कमेटी के सदस्य और उत्तराखंड के रिटायर्ड मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक, कई जगह बुजुर्ग लोगों ने बालिग बच्चों की सम्पत्ति में निश्चित अधिकार देने के लिए रिवर्स इनहेरिटेंस की मांग की है। उन्होंने बताया कि अभी इसके लिए मेंटिनेंस का अधिकार है, लेकिन बुजुर्गों ने इसे कानूनी तौर पर पुख्ता करने के लिए विरासत के कानून के समकक्ष करने की मांग उठाई है। कुछ क्षेत्रों में सपिंड विवाह को मान्यता देने के लिए हिंदू मैरिज ऐक्ट में संशोधन की भी मांग उठाई गई है। सिंह ने बताया, जनसुनवाई में कई विशिष्ट जानकारियां सामने आ रही हैं, शुरुआत में इसकी कल्पना तक मुश्किल थी। कमेटी कई नजरियों को देखने समझने की कोशिश कर रही है। कमेटी ने पहले सात अक्तूबर तक लोगों को सुझाव देने को कहा था, बाद में इस अवधि को 22 अक्तूबर तक बढ़ा दिया गया। यह समयसीमा अब समाप्त हो चुकी है। इस दौरान कमेटी के पास पोर्टल के माध्यम से 60,810 और ईमेल से करीब 20 हजार सुझाव आए। हजारों लोगों ने पत्र के माध्यम से सुझाव दिए। इस तरह अब तक मिले कुल सुझावों की संख्या सवा लाख के पार जानी तय है। हालांकि तमाम लोगों ने सुझाव देने के बजाय समान नागरिक संहिता के पक्ष या विपक्ष में अपनी बात कही है। शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि सुझाव देने की समयसीमा समाप्त हो चुकी है। अब कमेटी जनसुनवाई पर ज्यादा ध्यान देगी।