नई विधानसभा के गठन में अब फंसा नया पेच

जनादेश/देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया। अब उत्तराखंड में बहुमत हासिल करने के बाद सबकी निगाहें नई सरकार के गठन पर लग गई हैं। लेकिन भाजपा के हलकों में यह चर्चा है कि नई सरकार के गठन में कुछ देरी हो सकती है। इसका कारण होलाष्टक माना जा रहा है। दरअसल, 10 मार्च से होलाष्टक लगा है जो अगले आठ दिन होली तक रहेगा। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं ने भी ऐसे आसार जताए हैं कि होलाष्टक के कारण सरकार के गठन में देरी हो सकती है। बता दें कि माना जाता है कि होलाष्टक के दौरान कोई शुभ या मंगल कार्य नहीं होता। उधर, बृहस्पतिवार को चुनाव परिणाम आने के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) को इस्तीफा सौंप दिया।

नई सरकार के गठन तक मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद सदस्यों को कार्यवाह जिम्मेदारी
इसके साथ ही उन्होंने मंत्रिपरिषद के सदस्यों का इस्तीफा भी राज्यपाल को दिया। इससे पहले धामी ने राज्य सचिवालय में कैबिनेट की बैठक की और सबका धन्यवाद किया। उसके बाद वह चार मंत्रियों के साथ राजभवन चले गए। राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार कर नई सरकार के गठन तक मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद सदस्यों को कार्यवाह जिम्मेदारी देखने को कहा। मुख्य सचिव एसएस संधू ने मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद के त्यागपत्र स्वीकार करने और उन्हें कार्यवाह जिम्मेदारी सौंपने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, अरविंद पांडे, यतीश्वरानंद, गणेश जोशी आदि शामिल रहे। मैंने पार्टी की दी गई जिम्मेदारी को निभाया। मुझे खुशी है कि प्रदेश की जनता ने भाजपा को बहुमत दिया। मुझे आगे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे संपूर्ण क्षमता के साथ निभाऊंगा।

नई विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी
भारत निर्वाचन आयोग ने नई विधानसभा के गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार गठन के बाद प्रोटेम स्पीकर मनोनयन होगा। राज्यपाल प्रोटेम स्पीकर को शपथ दिलाएंगे और प्रोटेम स्पीकर नए स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया पूरी करेंगे। फिर स्पीकर विधानसभा सदस्यों को शपथ दिलाएंगे।
धामी की हार से सीएम तय करने में भाजपा उलझन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की हार से भाजपा उत्तराखंड में सीएम पद पर नाम को लेकर उलझन में है। इस बीच पार्टी ने केंद्रीय मंत्रियों पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। दोनों नेता जल्द होने वाली विधायक दल की बैठक में सीएम के नाम पर विधायकों की राय से पार्टी नेतृत्व को अवगत कराएंगे। हालांकि विधायक दल की बैठक कब होगी, इसकी तारीख तय नहीं की गई है। उत्तराखंड में भाजपा ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल करने का कीर्तिमान बनाया है। हालांकि चुनाव से चंद महीने पहले मुख्यमंत्री बनाए गए धामी खटीमा से चुनाव हार गए। इसके बाद पार्टी नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर पशोपेश में है। पार्टी में नए सीएम के नामों पर कयासबाजी का दौर जारी है।  अलग-अलग गुट इस पद के लिए अपने नेता की दावेदारी कर रहे हैं। दो विधायकों ने धामी के लिए अपनी सीट से इस्तीफा का प्रस्ताव दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व धामी पर दांव लगाएगा या नया चेहरा पेश करेगा, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बलूनी, निशंक, अजय व सतपाल महाराज के नाम चर्चा में
प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने धामी के हाथ में सरकार की कमान देने की घोषणा की थी। पीएम राज्य में नया और युवा नेतृत्व को उभारना चाहते हैं। इसलिए पांच साल के कार्यकाल में राज्य को धामी के रूप में तीसरा मुख्यमंत्री मिला। हालांकि धामी की हार ने पार्टी का समीकरण बिगाड़ दिया है। नए दावेदारों में पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी, पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट का नाम लिया जा रहा है। सतपाल महाराज के नाम की भी चर्चा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व की पसंद युवा नेता ही होगी।

नतीजे के बाद नहीं हुई है विस्तृत चर्चा
पार्टी सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार को नतीजे आने के बाद अलग-अलग राज्यों में सरकार के गठन को लेकर कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई है। महज उत्तराखंड के लिए गोयल और प्रधान को पर्यवेक्षक बनाने का फैसला किया गया है। नतीजे के दूसरे दिन पीएम और गृहमंत्री शाह दोनों गुजरात में हैं। ऐसे में इनके वहां से लौटने के बाद संभवत: रविवार को अलग-अलग राज्यों में सरकार के गठन और शपथ की तारीख पर चर्चा होगी।

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