किराया न होने से स्टेशन से बेरंग लौटे प्रवासी मजदूर, भुखमरी में लूट रही सरकार

लालू यादव ने कोसी बाढ आपदा में मुफ्त चलाई थी ट्रेन, पियुष गोयल ले रहे किराया

नई दिल्लीः देश में कोरोना कहर के कारण लगे लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की हालात खस्ताहाल है। 40 दिन से ज्यादा समय से न काम है न एक फुटी कौड़ी है ऐसे में सरकार द्वारा उन्हे उनके घर भेजने की व्यव्स्था तो की गई लेकिन उसमें भी किराया लिया जा रहा है। ऐसें में 68 प्रतिशत लोग अपने घर जाने से महरूम रह गए । स्टेशन से ही उन्हें वापय जा ना पड़ा। बता दें कि 2008 में बिहार के कोसी में बाढ़ आई थी। उस समय रेल मंत्री लालू प्रसाद थे। उन्होंने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए छह ट्रेनें मुफ्त में चलवाई थीं। लेकिन केंद्र सरकार के इस रवैये से राजनीति में घमासान मच गया है।

बता दें कि 1 मई को गृहमंत्रालय ने मज़दूर दिवस के मौके पर श्रमिक स्पेशल चलाने का फ़ैसला किया ।लेकिन इसमें यह साफ नहीं किया गया था कि श्रमिक स्पेशल में मुफ्त यात्रा होगी या मज़दूरों से किराया लिया जाएगा। लेकिन लालू यादव के समय में आपदा में पीडितों को घर पहुंचाने के लिए मुफ्त ट्रेन चलाई थी। गृहमंत्रालय ने जिस नोटिफिकेशन में एलान किया था कि श्रमिक स्पेशल चलेगी उसमें लिखा था कि रेलवे पैसा लेगी। रेलवे गाइडलाइन तय करेगी कि टिकटों की बिक्री कैसे होगी।

मजदूरों से लिए जा रहे 50 रू ज्यादा किराया

रेलवे के प्रवक्ता ने संवाददाताओं को मैसेज किया था कि मज़दूरों का किराया राज्य सरकार देगी। रेलवे यात्रियों से कोई किराया नहीं लेगी क्योंकि उसके लिए काउंटर खोलना पड़ेगा। लेकिन द हिन्दू की ख़बर बताती है कि रेल बोर्ड के सर्कुलर के अनुसार श्रमिक स्पेशल के मज़दूर यात्रियों से किराया और 50 रुपये अतिरिक्त भार लिए जाएंगे। स्लीपर क्लास का किराया लेने की बात कही गई है। इसके अलावा 30 रुपये सुपरफास्ट चार्ज और 20 रुपए अतिरिक्त. कुल 50 रुपये।

लालू यादव में मुफ्त में चलाई थी ट्रेन, एक करोड़ रूपए किए थे दान

बता दें कि 2008 में  रेल मंत्री लालू प्रसाद ने कोसी के बाढ़ पीड़ितों के लिए छह ट्रेनें मुफ्त में चलवाई थीं। सहरसा-मधेपुरा, पूर्णिया-बमनखी, सहरसा-पटना के बीच चार ट्रेनें और समस्तीपुर से सहरसा के बीच दो ट्रेनें चलाई गई थी। बाढ़ ने सबको आर्थिक रूप से उजाड़ दिया था इसलिए लालू प्रसाद ने मुफ्त में ये ट्रेनें चलवाई थीं। जैसा समय आज है। लॉकडाउन ने प्रवासी मजदूरों किसानों सबको पाई-पाई के लिए मोहताज कर दिया है। लेकिन उसके बावजूद लालू यादव ने यह नहीं कहा था न प्रचार किया था अपने प्रवासियों को मुफ्त पहुंचाने के फैसले को।

सूरत से उड़ीसा के ब्रह्मपुरी स्टेशन के लिए श्रमिक स्पेशल चली है उसके लिए जब उन्हें पता चला कि 710 रुपये किराया लगेगा तो मज़दूर रिश्तेदारों और दोस्तों से मदद मांगने लग गए. केरल से भी इसी तरह की ख़बर आई है। बसों को परमिट दिए जाने के कारण बहुत से मज़दूरों ने 4000 से 5000 रुपये देकर बस यात्रा की है। एक परिवार पर 15 से 20 हज़ार का अतिरिक्त बोझ पड़ा होगा।

मामले में सरकार को विपक्ष ने घेर लिया है। अख‍िलेश यादव ने ट्वीट किया, ‘ट्रेन से वापस घर ले जाए जा रहे गरीब, बेबस मज़दूरों से भाजपा सरकार द्वारा पैसे लिए जाने की ख़बर बेहद शर्मनाक है। आज साफ़ हो गया है कि पूंजीपतियों का अरबों माफ़ करनेवाली भाजपा अमीरों के साथ है और गरीबों के ख़िलाफ़. विपत्ति के समय शोषण करना सूदखोरों का काम होता है, सरकार का नहीं।’