रेलवे भर्ती घोटाले में फिर फसे लालू,भ्रष्टाचार का नया केस दर्ज़

जनादेश/नई दिल्ली: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एक बार फिर केंद्रीय जांच ब्यूरो के निशाने पर हैं। रेलवे में नौकरियों के बदले जमीनें हड़पने के मामले में सीबीआई ने शुक्रवार सुबह एक साथ कार्रवाई कर उनके व उनके परिजनों से जुड़े 17 ठिकानों पर छापा मारा है। सूत्रों की माने तो, लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती के पटना, गोपालगंज और दिल्ली स्थित ठिकानों पर ये कार्रवाई की जा रही है। सीबीआई ने राजद सुप्रीमो के खिलाफ रेलवे भर्ती घोटाले को लेकर नया केस दर्ज किया है। अधिकारियों के मुताबिक सीबीआई ने रेलवे भर्ती घोटाले को लेकर पहले प्राथमिक जांच दर्ज की थी, लेकिन उसे अब एफआईआर में तब्दील कर दिया गया है। एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा व हेमा तथा कई आवेदकों के खिलाफ खोजबीन शुरू की है। यह केस भादंवि की धारा 120 बी. आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की विभिन्न धाराओं में दर्ज किया गया है।

यादव परिवार पर आरोप लगा है कि उन्होंने 2008 से 2009 के बीच रेलवे में नौकरियां लगवाने के बदले कई सम्पत्तियों पर हाथ साफ किया था। राजद सूत्रों का कहना है कि लालू के छोटे पुत्र व बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव इस वक्त लंदन में हैं। महज कुछ घंटों बाद तेजस्वी यादव को लंदन में ‘आईडियाज फॉर इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में ‘देश के भविष्य’ पर परिचर्चा को संबोधित करना है। तेजस्वी को पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बात रखने का अवसर मिला है। लालू यादव पर आरोप है, कि संप्रग सरकार के जब वह रेल मंत्री थे, तब नौकरी लगवाने के बदले में आवेदकों से जमीन और प्लॉट लिए गए थे। सीबीआई ने इस मामले में जांच के बाद लालू और उनकी बेटी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच तत्कालीन संप्रग सरकार में रेलमंत्री थे। जब वह रेल मंत्री थे, तब ऐसे कई मामले सामने आए थे कि नौकरी के बदले जमीन दी गई थी। सीबीआई छापों को लेकर राजद ने तंज कस्ते हुए कहा है – ‘तोता है, तोतों का क्या’। संप्रग काल में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को नेताओं का तोता करार दिया था।

राजद प्रवक्ता आलोक मेहता ने कहा है कि यह एक सशक्त आवाज को कुचलने का प्रयास है। यह पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है। उधर, लालू यादव के भाई प्रभुनाथ यादव ने कहा कि एक बीमार व्यक्ति को जानबूझकर इस तरह प्रताड़ित किया जा रहा है। इस कार्रवाई के पीछे आखिर किसका हाथ है, यह सबको पता है। राजद सुप्रीमो लालू यादव चंद दिनों पहले ही चारा घोटाले से जुड़े डोरंडा कोषालय मामले में जमानत पाकर आये हैं। यह मामला डोरंडा कोषागार से 139 करोड़ रुपये की निकासी का था। 27 साल बाद कोर्ट ने उन्हें फरवरी 2022 में इस घोटाले का दोषी माना था और पांच साल की सजा सुनाई थी। इसके पहले वे चारा घोटाले के अलग अलग मामलों में जेल की सजा काट चुके हैं।