लखनऊ में पूर्व आईजी की दम घुटने से हुई मौत , पत्‍नी और बेटे की हालत गंभीर

जनादेश/लखनऊ: शनिवार की रात लखनऊ के इंदिरा नगर के सेक्टर 18 में पूर्व आईजी के घर में धुआं भर जाने के चलते दम घुटने से दिनेश चंद्र पांडेय की मौत हो गई। बता दे कि उनकी पत्नी और बेटे की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। दोनों को राम मनोहर लोहिया संस्थान में भर्ती कराया गया है। घटना का कारण शार्ट सर्किट के चलते एसी में लगी आग बताया जा रहा है।आपको बता दे कि रिटायर आईजी दिनेश चंद्र पांडेय की उम्र 71 वर्ष थी। वह अपनी पत्नी अरुणा पांडेय ( उम्र 68 वर्ष) और बेटे शशांक पांडेय ( उम्र 32 वर्ष) के साथ इंदिरा नगर सेक्टर-18 के मकान नंबर 28 में पहली मंजिल पर रहते थे। शनिवार शाम खाना खाने के बाद तीनों एक ही कमरे में सो गए थे।

रात करीब 10:30 बजे दूसरे कमरे के एयरकंडीशनर में आग लग गई। इससे उस कमरे का पूरा सामान जलने लगा। दूसरे कमरे से निकला धुआं उस कमरे में भर गया, जिसमें दिनेश चंद्र पांडेय परिवार के साथ सोए थे। दम घुटने से तीनों कमरे में ही बेहोश हो गए। दिनेश चंद्र पांडेय मूलरूप से कानपुर के आर्यनगर के रहने वाले थे। दिनेश चंद्र पाण्डेय का एक बेटा प्रशांत बाहर रहता है। इसी के साथ रिटायर्ड आईपीएस दिनेश चंद्र पाण्डेय काफी संवेदनशील और शेर ओ शायरी में गहरी रुचि रखने वाले व्‍यक्ति थे। उनकी 12 गजलें खूब चर्चित हुई थीं। वह यूपी उर्दू अकादमी अवार्ड, फिराक गोरखपुरी अवार्ड तथा नाजिर अवार्ड से सम्मानित थे। उनके लिखे शेर विश्व पटल पर चर्चित हुए। उर्दू के नामचीन शायरों के कलाम संकलित करने वाली संस्था ‘रेख्ता’ के आर्काइव में भी नजर कानपुरी के नाम से उनका दखल था।

हालांकि डीसी पाण्डेय का लिखा शेयर ‘सूरत ए शाम ए सर बज्म जला दो मुझको, सुबह हो जाए तो अनवल से बुझा दो मुझको’ काफी प्रसिद्ध हुआ। शुरुआती जिंदगी डीसी पाण्डेय की संघर्षों से भरी थी फिर भी जिंदगी के हर पहलू, हर चुनौती का सामना करते हुए डीसी कानपुरी ने एक मुकाम हासिल किया। लिखने पढ़ने का शौक वर्दी के पीछे धड़कते दिल में कायम रहा। नतीजतन जो बातें खुलकर नहीं कह सकते थे उनको शायरी में पिरो देते। दिनेश चंद्र पांडेय 2009 वह रिटायर हुए थे। दिनेश चंद्र पाण्डेय राष्ट्रपति पदक से सम्मानित थे।जब धुएं से कमरा भर गया तो ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले किराएदार अनिल ने शोर मचाया। मोहल्ले वालों ने पुलिस को सूचना दी। खबर लगते ही आसपास के फायर स्टेशनों से दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंची। एसीपी गाजीपुर विजयराज सिंह ने बताया कि जब पुलिस ने कमरे का दरवाजा खोला तो तीनों बेहोश पड़े थे। सभी को तुरंत बाहर निकालकर लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया। जहां दिनेश चंद्र पांडेय की मौत हो गई।