उत्तर प्रदेश में 500 मतों के अंतर से हार-जीत का हुआ फैसला

जनादेश/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब एक दर्जन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की और समाजवादी पार्टी (सपा) की अगुवाई वाले गठबंधनों के बीच बेहद कांटे का मुकाबला हुआ और जीत व हार का फैसला 500 से भी कम मतों के अंतर से हुआ। चुनावी नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि 11 सीटों पर जीत और हार का अंतर 500 मतों का रहा जबकि डेढ़ दर्जन सीटें ऐसी रहीं जहां हार और जीत का फैसला एक हजार से भी कम मतों से हुआ। भाजपा गठबंधन के उम्मीदवारों ने सात सीटों पर सपा गठबंधन के प्रत्याशियों को 500 से भी कम मतों के अंतर से शिकस्त दी वहीं सपा गठबंधन के उम्मीदवारों ने इसी तरह चार सीटों पर भाजपा गठबंधन के उम्मीदवारों को पराजित किया।

उत्तर प्रदेश की 403 सीटों के लिए विधानसभा चुनाव में भाजपा, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी ने मिलकर 273 सीटों पर कब्जा जमाया वहीं समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी के गठबंधन के खाते में 125 सीटें गईं। अकेले भाजपा ने 255 सीटों पर जबकि समाजवादी पार्टी ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में आठ सीटों पर जीत और हार का फासला एक हजार से कम मतों का था। इनमें से पांच सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों को जबकि दो सीटों पर बहुजन समाज पार्टी और एक सीट पर सपा के उम्मीदवार को जीत मिली थी। पिछले चुनाव में सबसे कांटे का मुकाबला डुमरियागंज सीट पर हुआ था। यहां भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा की सैयदा खातून को 171 मतों से पराजित किया था।

इस बार के चुनाव में सबसे कांटे का मुकाबला बिजनौर जिले की तीन और बाराबंकी की दो विधानसभा सीटों पर हुआ। बिजनौर जिले की धामपुर विधानसभा सीट पर जबरदस्त टक्कर हुई। बेहद करीबी मुकाबले में यहां भाजपा के अशोक कुमार राणा ने सपा के नईम उल हसन को सिर्फ 203 मतों से पराजित किया। बिजनौर की चांदपुर सीट पर भी जबदरस्त मुकाबला देखने को मिला लेकिन जीत अंतत: सपा के स्वामी ओमवेश को मिली। उन्होंने भाजपा के कमलेश सैनी को 234 मतों से हराया। इसी जिले की नहटौर सीट पर दिलचस्प मुकाबला हुआ और कई दौर की उठापटक के बाद आखिरकार भाजपा के ओमकुमार ने रालोद के मुंशीराम को 258 मतों से हराया।