1500 राजस्व गांव में होगी सिविल पुलिस की तैनाती

जनादेश/देहरादून: उत्तराखंड में अंकिता हत्याकांड के बाद प्रशासन सख्त हो गया हैं। बता दें कि प्रदेश के राजस्व क्षेत्रों में अब सिविल पुलिस का दायरा बढ़ाया जा रहा है। दरअसल मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों के क्रम में प्रदेश के राजस्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 1500 गांवों को सिविल पुलिस क्षेत्र में लाने की तैयारी की जा रही हैं। जिसके तहत पुलिस मुख्यालय शासन को प्रस्ताव भेज रहा है। शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से सिविल पुलिस के अंतर्गत लिया जाएगा।

उत्तराखंड को पर्यटन के लिए जाना जाता हैं। जिस वजह से होटल, रिसार्ट, होम स्टे आदि की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। और साथ ही राजस्व क्षेत्रों में अपराध का ग्राफ भी बढ़ रहा है। दरअसल प्रदेश के राजस्व क्षेत्रों में कानून व सुरक्षा व्यवस्था का काम पटवारी पुलिस के पास है। लेकिन इनके पास न तो हथियार हैं और न ही पुलिस की तरह आधुनिक तकनीक। जिस वजह से अपराधी जल्दी से पकड़ में नहीं आते।

जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसके तहत हाईकोर्ट ने पटवारी पुलिस व्यवस्था को समाप्त करते हुए सारे क्षेत्र सिविल पुलिस को सौंपने को कहा था। इस फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट में गई है। हालाकि शासन के अधिकारियों का कहना हैं कि अभी न तो सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है और न ही कोई नया निर्णय दिया है।

वहीं मुख्यमंत्री धामी ने यमकेश्वर में हुई घटना के बाद बीती देर रात्रि मुख्य सचिव एसएस संधु, अपर मुख्य सचिव गृह राधा रतूड़ी व डीजीपी अशोक कुमार के साथ राजस्व क्षेत्रों में सिविल पुलिस तैनात करने के संबंध में चर्चा की थी। राजस्व क्षेत्रों में 7500 गांव हैं। पहले चरण में इनमें से 1500 गांवों को सिविल पुलिस के दायरे में लिया जाएगा। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।