UPPET एग्जाम से पहले 37 लाख छात्रों की ‘महापरीक्षा’, साफ़ दिखी लापरवाही 

जनादेश/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होने वाली यूपीपीईटी की परीक्षा देने के लिए 37 लाख अभ्यर्थियों की भीड़ निकली है। जिसके चलते सरकारी इंतजाम पर गंभीर सवाल उठाये जा रहे है। रेलवे स्टेशन और ट्रेन के अंदर तिल रखने की जगह भी नहीं बची। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि ऐसे में बच्चे कैसे अपने परीक्षा केंद्र जाएंगे। क्या इसके लिए पहले से इंतजाम नहीं होने चाहिए थे। यूपीपीईटी की परीक्षा से पहले बदइंतजामी दिख रही है। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

आपको बता दे ऐसा लग रहा है कि छात्रों को यूपीपीईटी की परीक्षा देने से पहले परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए महापरीक्षा देनी पड़ रही है। कई अभ्यर्थियों की तो पूरी रात रेलवे स्टेशन पर ही गुजर गई। इस बदइंतजामी को लेकर बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने नाम लिए बिना यूपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर पीलीभीत रेलवे स्टेशन की कुछ तस्वीरें शेयर की, जिनमें छात्र रेलवे स्टेशन पर भारी-भरकम भीड़ के बीच परेशान दिख रहे हैं।

बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने ट्वीट किया कि यूपी बाढ़ की चपेट में है और 37 लाख से अधिक छात्र PET की परीक्षा देने निकले हैं। प्रश्नपत्र हल करने से बड़ी चुनौती सेंटर तक पहुंचना है। छात्रों की निरंतर मांग के बाद भी ना परीक्षा टाली गई ना यातायात के पुख्ता इंतजाम किए गए। शायद ‘हवाई निरीक्षण’ से ‘जमीनी मुद्दे’ नहीं दिखते। बता दें कि यूपी में यूपीपीईटी की परीक्षा 15 और 16 अक्टूबर को आयोजित की गई है। यूपी के लगभग हर छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन पर भीड़ दिखाई दे रही है। इस परीक्षा में करीब 37 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। संघर्ष ऐसा कि मुसाफिरों की रूह कांप जाए। लेकिन आप इसे परीक्षा देने की ललक कहें या नौकरी पाने की मजबूरी, वक्त पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना हर किसी की मजबूरी है।

हालांकि यूपीपीईटी की परीक्षा देने आए अभ्यर्थी अनूप राय ने बताया कि ट्रेनों में बहुत भीड़ है। छात्राओं तक को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। वहीं छात्रा दुर्गेश्वरी ने कहा कि ट्रेनों में बहुत भीड़ है। वहां बैठने की कोई जगह नहीं है। गौरतलब है कि हर परीक्षार्थी ट्रेन के किसी डिब्बे में सवार हो जाना चाहता है। लेकिन ये इतना आसान नहीं है। तय वक्त पर तय डिब्बों वाली ट्रेन, भारी संख्या में रेलवे स्टेशनों पर मौजूद छात्र जाएं तो जाएं कहां। हजारों लड़के-लड़कियों की रात रेलवे स्टेशन पर ही कट गई। इसी आस में की शायद कोई सवारी गाड़ी मिल जाए और वो मंजिल तक पहुंच जाएं।