60 किमी पैदल चलकर 16500 फीट की ऊंचाई पर खोजा अनाम ताल

जनादेश/डेस्क: उत्तराखंड अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता हैं। यहां एक से बढ़कर एक झील, ताल, झरनें, पहाड़ सब कुछ हैं। उत्तराखंड के दुर्गम पहाडो, जंगलो और बुग्याल के बीच में मौजूद ये झील, कुंड और ताल बरसो से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे है। यह सुंदरता किसी को भी मंत्रमुग्ध कर देता है।

दरअसल रूद्रप्रयाग की मद्दमहेश्वर घाटी में मदमदमहेश्वर से 6 युवाओं नें 6 दिन में 60 किमी पैदल चलकर 16500 फीट की ऊंचाई पर एक अनाम ताल की खोज करके हर किसी को आश्चर्यचकित कर दिया। यह ताल दिल के आकार में हैं और बेहद खूबसूरत हैं। इस अनाम ताल को खोजने में 6 सदस्यीय इस दल में गौण्डार गाँव निवासी अभिषेक पंवार, आकाश पंवार, बडियारगढ़-टिहरी गढ़वाल निवासी विनय नेगी, मनसूना गिरीया निवासी दीपक पंवार, खंडाह -श्रीनगर गढ़वाल निवासी अरविन्द रावत, बडियारगढ़- टिहरी निवासी ललित लिंगवाल शामिल थे। हालांकि दल ने बेहद कठिन, जोखिम भरे इस अनाम ताल के तक पहुंचने के लिए पूरी तैयारी की थी।

जानकारी के मुताबिक, इन्होनें सबसे पहले गूगल अर्थ मैप का अध्ययन कर रूट तैयार किया। जिसके बाद इस दल नें मदमहेश्वर – धौला क्षेत्रपाल – कांचनीखाल वाला रूट चुना। काफी चुनौतियों का सामना कर दुर्गम, जोखिम भरे रास्ते से होकर पहाड, बुग्याल, पथरीले रास्ते, ग्लेशियरों को पार करने के उपरांत आखिरकार इन 6 युवाओं के जुनून देश दुनिया को पहली बार हिमालय की अनमोल गुमनाम नेमत अनाम ताल का दीदार और साक्षात्कार करवाया। पूरा देश इन 6 युवाओं को सैल्यूट कर रहा है। देखा जाए तो इन युवाओ ने एक नया इतिहास जो लिख दिया है। क्योंकि ताल, झील और कुंड तक पहुंचना किसी रहस्य, रोमांच से कम नहीं है। गौरतलब हैं कि, रूपकुंड, सप्तकुंड, कागभूषडिं ताल, संतोपथ ताल, हेमकुंड, देवताल, पार्वती कुंड, ब्रह्मताल, नंदीकुंड, वासुकीताल, केदारताल सहित कई ताल है जहां आज भी पहुंचना बेहद कठिन है।