आनंद सुब्रमण्यम की जमानत याचिका खारिज

जनादेश/नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने एनएसई को-लोकेशन मामले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के पूर्व समूह संचालन अधिकारी (जीओओ) आनंद सुब्रमण्यम की जमानत याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने सीबीआई और सुब्रमण्यम के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुनाया। गौरतलब है कि सुब्रमण्यम को 24 फरवरी को सीबीआई ने चेन्नई से गिरफ्तार किया था और  वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में हैं।

न्यायिक हिरासत में है सुब्रमण्यम
बता दें कि आनंद सुब्रमण्यम को विशेष सीबीआई अदालत ने 9 मार्च को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सीबीआई के वकील ने कहा कि सुब्रमण्यम, जो एनएसई की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण को प्रभावित करने के लिए कथित हिमालयी योगी के रूप में प्रतिरूपित थे पूछताछ के दौरान टालमटोल करते रहे, ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए। वहीं सुब्रमण्यम के वकील ने उनके हिमालयी योगी होने से इनकार करते हुए इस आधार पर जमानत पर रिहा करने की मांग की थी कि प्राथमिकी में उनका नाम शमिल नहीं था और इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। इस पूरे मामले में आनंद पर आरोप है कि वह चित्रा रामकृष्ण को कंट्रोल कर रहा था।

चित्रा रामकृष्ण पर हैं गंभीर आरोप
एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण पर भी कई गंभीर आरोप हैं। चित्रा रामकृष्ण अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक एनएसई की एमडी और सीईओ थी। गौरतलब है कि चित्रा पर हिमालयन योगी के इशारे पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का संचालन करने और संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है। सीबीआई ने इस पूरे मामले में चित्रा रामकृष्ण को बीती छह मार्च को मुंबई से गिरफ्तार किया था। चित्रा को आनंद सुब्रमण्यन की नियुक्ति में अनियमितता बरतने और कथित हिमालय के योगी को संवेदनशील जानकारी देने और उसके इशारों पर काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

क्या है को-लोकेशन स्कैम?
एनएसई को-लोकेशन मामले में प्राथमिकी साल 2018 में  दर्ज की गई थी। दरअसलल, शेयर खरीद-बिक्री के केंद्र देश के प्रमुख नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कुछ ब्रोकरों को ऐसी सुविधा दे दी गई थी, जिससे उन्हें बाकी के मुकाबले शेयरों की कीमतों की जानकारी कुछ पहले मिल जाती थी। इसका लाभ उठाकर वे भारी मुनाफा कमा रहे थे। इससे संभवत: एनएसई के डिम्यूचुलाइजेशन और पारदर्शिता आधारित ढांचे का उल्लंघन हो रहा था। धांधली करके अंदरूनी सूत्रों की मदद से उन्हें सर्वर को को-लोकेट करके सीधा एक्सेस दिया गया था। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को इस संबंध में एक अज्ञात सूचना मिली। इसमें आरोप लगाया गया था कि एनएसई के अधिकारियों की मदद से कुछ ब्रोकर पहले ही जानकारी मिलने का लाभ उठा रहे हैं। एनएससी में खरीद-बिक्री तेजी को देखते हुए घपले की रकम पांच साल में 50,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।