देश के कूड़ा मुक्त शहरों में से एक अलीगढ़ में लगे अब हर जगह कचरे के ढेर

जनादेश/अलीगढ़: देश के कूड़ा मुक्त शहरो में से एक अलीगढ में अब हर जगह कूड़े का ढेर देखने को मिलेगा। भारत सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा की गई उपलब्धियों की तस्वीर अब धुंधली हो गई है। पिछले साल मंत्रालय द्वारा प्रकाशित सूची में अलीगढ़ को तीसरा स्थान दिया गया था। अलीगढ़ नगर निगम को विभिन्न स्तरों पर राष्ट्रीय टीम द्वारा की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर जीएफसी पुरस्कार दिया गया। अलीगढ़ के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और झांसी भी इस सूची में भी शामिल थे। लेकिन, पुरस्कार मिलने के बाद ही शहर की सफाई व्यवस्था अपने पुराने स्वरूप में लौट आई।

स्वच्छ भारत मिशन अर्बन कीतरफ से जनवरी 2021 में देशभर के कचरा मुक्त शहरों का सर्वे किया गया था। जब नतीजा आया तो नगर निगम के अधिकारियों के चेहरे खिल उठे थे। इसमें राष्ट्रीय टीम ने कचरा प्रबंधन, कचरा निपटान प्रणाली, घर-घर जाकर कचरा संग्रहण व अन्य बिंदुओं पर भौतिक परीक्षण भी किया गया था। सर्वे से पहले तत्कालीन नगर आयुक्त प्रेम रंजन सिंह ने काफी काम किया था। इसमें हटाए गए लैंडफिल की स्थापना, घरों से गीले और सूखे कचरे का संग्रह, बाजारों में रात की सफाई, पूरे शहर में कचरे के डिब्बे लगाना और उनकी नियमित सफाई, प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाना और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को अपनाना शामिल है।

बाजारों में उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय, गुलाबी शौचालय बनाए गए थे। इतना ही नहीं वॉल पेंटिंग और सेल्फी स्पॉट बनाकर पूरे शहर को सजाया गया था। शायद यही वजह है कि अलीगढ़ को कचरा मुक्त शहरों की सूची में तीसरा स्थान मिला है। लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। दावाघरों में दोपहर तक कूड़ा नहीं उठाया जाता है। वहीं, सुबह 10 बजे कूड़ा उठाने के निर्देश दिए गए है। नालों में कचरा भरा है।

जर्जर सड़कें राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि अलीगढ़ अगले चुनाव में कहां खड़ा होगा। शहर के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमके माथुर का कहना है कि सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। नई एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि प्रभावी कार्रवाई की जा सके।