एम्स ने आपात स्थिति के लिए बनाई खास किट

जनादेश/नई दिल्ली: नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने आंखों के लिए एक खास इमरजेंसी किट बनाई है। आगामी दिनों में सरकार के साथ मिलकर सभी जिलों में इसे उपलब्ध कराया जा सकता है। इसमें मौजूद उपकरण के जरिए दवा को आंखों में डाला जाता है, जिसके बाद पलभर में ही न सिर्फ मरीज को आराम पहुंचता है, बल्कि उसकी रोशनी जाने से भी बच सकती है। इसके बाद आसपास के किसी बड़े अस्पताल में जाकर मरीज का उपचार जारी रखा जा सकता है।

यह जानकारी एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के स्थापना दिवस समारोह में डॉक्टरों ने दी। 55 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में केंद्र के प्रमुख डॉ. जेएस टिटियाल ने बताया कि लॉकडाउन के बाद भी उनके संस्थान में सेवाएं जारी रहीं। इलाज के साथ डॉक्टरों की पढ़ाई और प्रशिक्षण तक जारी रखा। इसी का परिणाम है कि साल 2021 में कोरोना की आक्रामक लहर आने के बाद भी यहां 2 लाख 88 हजार से ज्यादा मरीजों का उपचार किया गया। पूरे साल 32 हजार से ज्यादा मरीजों के ऑपरेशन हुए। इसी साल में कोरोना की वजह से कॉर्निया प्रत्यारोपण के मामले में कमी जरूर आई है, लेकिन फिर भी संस्थान ने पूरे वर्ष में 778 नेत्रों को दान में एकत्रित किया, जिनमें 670 लोगों को प्रत्यारोपित करने के बाद उनके जीवन में रोशनी दी है।

डॉ. टिटियाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर देखने को मिलता है कि किसी घटना में आंखों को चोट पहुंचती है और मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि इन इलाकों में नेत्ररोग विशेषज्ञों का अभाव है। ऐसे में संस्थान ने एक इमरजेंसी किट तैयार की है, जिसके इस्तेमाल से मरीज को प्राथमिक उपचार के तौर पर सेवा दी जा सकती है और होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

5.2 फीसदी मरीजों में मिला ब्लैक फंगस
एम्स में उपचार के लिए आए 5.2 फीसदी मरीजों में ब्लैक फंगस के मामले सामने आए। इनमें 52 फीसदी लोगों की आंखों को निकालने की जरूरत नहीं पड़ी। आरपी सेंटर में ब्लैक फंगस को लेकर 520 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 5.3 फीसदी मरीज में ब्लैक फंगस मिला, जिनमें से 127 मरीज का उपचार पहले ही चल रहा था।