राहुल के बाद प्रियंका भी राजनीति में फेल

जनादेश/नई दिल्ली: पांच राज्यों में आज हुए चुनाव के लिए मतगणना जारी है। लगभग सभी राज्य स्पष्ट चित्र दिखाते हैं। लेकिन सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा है। पंजाब में सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस की हालत सबसे खराब है। इसके अलावा गोवा में भी उनकी सीटों में कमी आई है। मणिपुर में भी कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश में पूरे अभियान की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली थी। लड़की हूं लड़ शक्ति हूं का नारा देकर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही थी। उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस को 2017 के मुकाबले ज्यादा नुकसान हो रहा है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को 1 सीट का फायदा होता दिख रहा है। पांच राज्यों में हुए चुनाव में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जमकर प्रचार किया था। लेकिन कांग्रेस का प्रदर्शन रुझानों में दिख रहा है। वहीं कहीं न कहीं कांग्रेस नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगेंगे।
सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी के बाद अब प्रियंका गांधी भी चुनावी राजनीति में फेल होती दिखाई दे रही है क्योंकि उन्होंने पूरा ताकत उत्तर प्रदेश में झोंक दिया था। बावजूद इसके कांग्रेस को बड़ा नुकसान होता दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा वह पंजाब और मणिपुर में भी गई थी जहां उन्होंने पार्टी के लिए प्रचार किया। प्रियंका और राहुल ने ही पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया था जिन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी घोषित कर दिया गया था। हालांकि जिस तरीके से चुनावी राज्यों में कांग्रेस का प्रदर्शन रहा है, उससे कहीं ना कहीं पार्टी के अंदर एक बार फिर से नेतृत्व को लेकर सवाल उठने शुरू हो जाएंगे। जी- 23 के नेता एक बार फिर से आलाकमान के खिलाफ मुखर हो सकते हैं। इस बार के चुनाव में कांग्रेस के लिए किस तरीके से प्रदर्शन खराब रहा, उसे यहां समझिए।

राज्यों में खराब प्रदर्शन:

• प्रियंका गांधी के यूपी में पार्टी की कमान संभालने के बावजूद, राज्य में कांग्रेस का वोट शेयर आधा हो गया है।

• पंजाब में कांग्रेस का वोट शेयर 2017 में 38.5% से गिरकर 2022 में 23.3% हो गया है।

• 2017 में सबसे बड़ी पार्टी से कांग्रेस गोवा और मणिपुर में दूसरे स्थान पर रही। दोनों राज्यों में पार्टी के वोट शेयर में गिरावट आई है।

• मणिपुर में कांग्रेस का वोट शेयर भी 2017 में 35.1% से आधा होकर 2022 में 17% हो गया है।

• कांग्रेस के साथ गठबंधन सहयोगी दलों के लिए विनाशकारी है। जीएफपी ने 2017 में 3 सीटें जीती थीं। अब कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद सिर्फ एक सीट पर आगे चल रही है।