आख़िर क्यों अमेरिका-सऊदी अरब विवाद के बीच कूदा पाकिस्तान 

जनादेश/डेस्क: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार की दिशाहीनता फिर जाहिर हुई है। आपको बता दे जिस समय कूटनीतिक हलकों में यह धारणा बन रही थी कि अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों का बुरा दौर गुजर गया है, उसी वक्त शरीफ सरकार ने तेल उत्पादन कटौती के मुद्दे पर सऊदी अरब समर्थन कर नया पेच डाल दिया है। अमेरिका सऊदी अरब के इस फैसले से बेहद नाराज है। अमेरिका में लगातार राष्ट्रपति जो बाइडन से सऊदी अरब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

सऊदी अरब के नेतृत्व में तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक+ ने हाल में कच्चे तेल के उत्पादन में रोजाना 20 लाख बैरल की कटौती करने का फैसला किया था। ओपेक+ के फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव और चढ़ गया है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान का हित तेल के सस्ता होने में है। पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था का एक बड़ा कारण कोरोना महामारी और खासकर यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम के दाम में आया भारी उछाल है। इस कारण पाकिस्तान को पेट्रोलियम की खरीद पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है। यहां जानकारों में आम राय है कि ओपेक+ के फैसले से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था का संकट बढ़ा है। इसीलिए अब जिस तरह पाकिस्तान ने सऊदी अरब का समर्थन किया है, उस पर यहां भी हैरत जताई गई है।

हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा- ‘ओपेक+ के फैसले के बाद जिस तरह के बयान सऊदी अरब के खिलाफ जारी किए गए हैं, उसे देखते हुए पाकिस्तान सऊदी अरब के नेतृत्व साथ अपनी पूरी एकजुटता जाहिर करता है। हम बाजार में अस्थिरता से बचने और विश्व में आर्थिक स्थिरता लाने की सऊदी अरब की चिंताओं को समझते हैं। पाकिस्तान ऐसे मुद्दों पर सबको बातचीत और परस्पर सम्मान पर आधारित रचनात्मक रुख अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।’

इसी के साथ कुछ विश्लेषकों ने इस बयान के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बयान से यहां पैदा हुई नाराजगी को माना है। बाइडन ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा पर सवाल उठाए थे। उससे दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आई है। पाकिस्तान ने उस बयान पर औपचारिक विरोध पत्र अमेरिका को भेजा था। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी राजदूत को बुला कर उनके सामने भी अपना विरोध जताया था। अब समझा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान का जवाब देने के लिए पाकिस्तान ने सऊदी अरब के पक्ष में खड़ा होने का फैसला किया है। लेकिन यहां कूटनीतिक विशेषज्ञों ने इस तरफ ध्यान खींचा है कि बाइडन के बयान के बाद उनके प्रशासन ने स्थिति को संभालने की कोशिश की।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अपने परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा करने की पाकिस्तान की क्षमता को लेकर अमेरिका आश्वस्त है। लेकिन अब संकेत हैं कि बाइडेन के बयान से देश में पैदा हुई गहरी नाराजगी और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के उसका फायदा उठाने की कोशिशों को देखते हुए शहबाज शरीफ सरकार दबाव में आ गई है। लेकिन इसका यह नतीजा भी होगा शरीफ के शासनकाल में अमेरिका के साथ रिश्तों में जो सुधार आया, वह दिशा फिर पलट सकती है। इसका ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को ही होगा।