आखिर हम क्यों कहते हैं उत्तराखंड को देवभूमि

जनादेश/देहरादून: भारत के उत्तरी हिस्से में बसा खूबसूरत राज्य उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए काफी प्रसिद्ध माना जाता है। यहां हिमालय के ऊँचे शिखर, हसीन वादियां, बर्फ के चादर से ढके पर्वत तथा राज्य के कण-कण पर पवित्र मंदिरों का बसेरा ही इस राज्य की खूबसूरती को दर्शाता है और इसी खूबसूरती के कारण उत्तराखंड को पृथ्वी का स्वर्ग माना जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। देवों की भूमि “देवभूमि” कहलाने का गौरव उत्तराखंड को हजारों साल पहले ही मिल गया था।

कहा जाता है कि पौराणिक काल में इसी देवभूमि में बहुत से देवी-देवताओं द्वारा अवतार लिया गया था। क्योकि पौराणिक काल में यही देवभूमि बहुत से देवी-देवताओं का निवास स्थान हुआ करता था।

इसी कारण यहाँ के लोगो द्वारा जहां भी भगवान की उपस्थिति महसूस की गई उस स्थान को मंदिर के रूप में बदल दिया गया। उत्तराखंड धर्म की नगरी है। यहाँ धर्म का, संस्कृति का बहुमूल्य रूप से से पालन किया जाता है। इसी धर्म के अनुसार चार धाम की यात्रा को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।

यह चार धाम यात्रा महत्वपूर्ण यात्रा के साथ-साथ एक धार्मिक यात्रा भी कहलाया जाता है। चार धाम –बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री उत्तराखंड राज्य में ही स्थित है।

उत्तर का यह पहाड़ी राज्य देश की सबसे विशाल, पवित्र और पावन नदी गंगा, यमुना,सरस्वती का उद्गम स्थल भी है। लाखों श्रद्धालु इन नदियों में जल अर्पण करने के लिए आते हैं.और हिंदू धर्म के अनुसार इस जल अर्पण को पुण्य एवं भक्ति रूपी कार्य माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि देवभूमि उत्तराखंड में भगवान शिव का ससुराल भी है। भगवान शिव का ससुराल हरिद्वार जिले के कनखल में स्थित है। यह जगह दक्ष प्रजापति नगर के नाम से भी जाना जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार हर सावन के महीने में भगवान शिव का यहां आगमन होता है और इसी जगह में उनका विवाह माता सती के साथ हुआ था ,इसीलिए यह जगह उनके ससुराल के नाम से जाना जाता है।