शराब नहीं बिकने से प्रतिदिन राज्य सरकारों को हो रहा था 700 करोड़ रुपए का नुकसान

पहले ही दिन में पांच राज्यों में बिकी 554 करोड़ रुपए की शराब 

नई दिल्लीः देश में कोरोना महामारी को रोकने के लिए लॉकडाउन का तीसरा चरण चालू हो गया है। इसमें कुछ रियायते दी गई है। शराब बिक्री पर लगी रोक को हटा दिया गया है। हर जोन में शराब की खरीद के लिए भीड़ दिख रही है। शराब की दुकानों को फिर से खोलने की छूट कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के अब तक के सभी प्रयासों पर भारी पड़ती दिख रही है। सोमवार की तरह आज भी सड़कों और दुकानों पर लोगों की बेतहाशा भीड़ देखने को मिल रही है। शराब लेने के लिए लोग इतने व्याकुल हैं कि उन्हें न अपनी परवाह है और न ही अपनों की। शारीरिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) के सारे इंतजाम और दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर शराब बिक्री पर से ही रोक क्यों हटानी पड़ी। राज्यों में दी गई छूट को देखें तो यह पाएंगे कि हर राज्य में बाकी चिजों पर रोक अभी भी है लेकिन शपाब की बिक्री पर से रोक हटा दी गई है। इसका बड़ा कारण शराब बिक्री न होने से राजस्व को होने वाला नुकसान है। राज्यों को प्रतिदिन करीब 700 करोड़ का बड़ा नुकसान हो रहा था। जिसे ज्यादा समय तक रोका नहीं जा सकता ।

दरअसल, शराब की बिक्री से राज्यों को सालाना 24% तक की कमाई होती है। एक ही दिन में कर्नाटक में 3.9 लाख लीटर बीयर और 8.5 लाख लीटर देशी शराब बिकी। इससे सरकार को 45 करोड़ का रेवेन्यू मिला। कुछ दिन पहले पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार से शराब की दुकानें खोलने की इजाजत मांगी थी। लेकिन, सरकार ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया। अमरिंदर सिंह ने एक इंटरव्यू में बोला भी कि उनकी सरकार को 6 हजार 200 करोड़ रुपए की कमाई एक्साइज ड्यूटी से होती है। उन्होंने कहा, ‘मैं ये घाटा कहां से पूरा करूंगा? क्या दिल्ली वाले मुझे ये पैसा देंगे? वो तो 1 रुपया भी नहीं देने वाले।’

अंग्रेजी अखबार द हिंदू के मुताबिक, शराब की बिक्री बंद होने से सभी राज्यों को रोजाना 700 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।  देश के 5 राज्यों में एक ही दिन में 554 करोड़ रुपए की शराब बिक गई। सोमवार को उत्तर प्रदेश में 225 करोड़, महाराष्ट्र में 200 करोड़, राजस्थान में 59 करोड़, कर्नाटक में 45 करोड़ और छत्तीसगढ़ में 25 करोड़ रुपए की शराब बिकी। जिससे यह बात साफ हो जाती है कि आखिर सरकार को शराब की दूकाने खोलने की जल्दबाजी क्यों थी।

गौरतलब है कि राज्य सरकारों की कमाई के मुख्य सोर्स हैं- स्टेट जीएसटी, लैंड रेवेन्यू, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट-सेल्स टैक्स, शराब पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और बाकी टैक्स।सरकार को होने वाली कुल कमाई में एक्साइज ड्यूटी का एक बड़ा हिस्सा होता है। एक्साइज ड्यूटी सबसे ज्यादा शराब पर ही लगती है। इसका सिर्फ कुछ हिस्सा ही दूसरी चीजों पर लगता है।क्योंकि, शराब और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है। इसलिए, राज्य सरकारें इन पर टैक्स लगाकर रेवेन्यू बढ़ाती हैं।