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RJD के कद्दावर नेता को याद कर भावुक हुए लालू यादव, ट्वीट कर लिखी यह बात

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जनादेश/पटना: राष्ट्रीय जनता दल के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह की आज पहली पुण्यतिथि मनाई जा रही है। आरजेडी कार्यालय में भी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है। वहीं दूसरी ओर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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लालू यादव ने सोमवार को ट्वीट कर लिखा, “संघर्षों के साथी हमारे प्रिय ब्रह्म बाबा रघुवंश बाबू को उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।” वहीं तेजस्वी यादव ने लिखा, “अभिभावक, पार्टी के संस्थापक सदस्य, समता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पित, गांव, गरीब और किसान की नब्ज समझने वाले वरिष्ठ समाजवादी नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह जी की उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि।

आपको बता दें कि वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन से ना सिर्फ बिहार ने बल्कि भारतीय राजनीति ने एक अनुभवी और जमीनी स्तर का जननेता खो दिया। रघुवंश प्रसाद सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह एक फक्कड़ नेता थे और कॉलेज हॉस्टल में रहने के दौरान सिर्फ भूजा खाकर अपना पेट भर लेते थे।

आपातकाल के बाद साल 1977 में हुए चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आयी।जनता पार्टी ने कांग्रेस की सत्ता वाली 9 राज्य सरकारों को बर्खास्त कर दिया जिसमें बिहार भी शामिल था। इसके बाद बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए और कर्पूरी ठाकुर से नजदीकी और छात्र आंदोलन से मिली लोकप्रियता के दम पर रघुवंश प्रसाद सिंह को सीतामढ़ी की बेलसंड सीट से टिकट मिल गया और वह चुनाव जीत भी गए। इतना ही नहीं वह बिहार सरकार में मंत्री भी बने।साल 1988 में कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह, लालू यादव के करीब आ गए और राजद के शासनकाल में बिहार सरकार में मंत्री रहे।

साल 1996 में लोकसभा का चुनाव लड़कर रघुवंश प्रसाद सिंह केन्द्र की राजनीति में आ गए और पहले एचडी देवेगौड़ा और फिर इंद्र कुमार गुजराल की सरकार में मंत्री रहे।साल 1999 में लालू यादव लोकसभा का चुनाव हार गए। जिसके चलते रघुवंश प्रसाद सिंह राजद के संसदीय दल के नेता चुने गए। इसी दौरान विपक्ष में बैठते हुए रघुवंश प्रसाद सिंह केन्द्र की अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ जिस तरह से सदन में तर्क करते थे, उससे उन्हें देशभर में पहचान मिली।रघुवंश प्रसाद सिंह का रोजगार गारंटी कानून बनाने में अहम योगदान रहा, जिसे बाद में मनरेगा के रूप में पहचान मिली। दरअसल यूपीए 1 के कार्यकाल में रघुवंश प्रसाद सिंह को ग्रामीण विकास मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था। इसी दौरान सदन में लंबी जिरह और तथ्यों से रघुवंश प्रसाद सिंह ने रोजगार गारंटी कानून बनाने में अहम योगदान दिया।

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