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UAE और तुर्की के बीच रिश्ता खत्म,दोनों देश कर रहे एक -दूसरे का बहिष्कार

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जनादेश/ नई दिल्लीः दुनिया में मुस्लिम जगत की दो ताक़तें सऊदी अरब और तुर्की एक-दूसरे से अब सीधी टक्कर लेते हुए दिख रही हैं। अब तक सिर्फ़ क़यास लगाए जाते थे कि दोनों देशों के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं और दोनों मध्य पूर्व में अपना एकछत्र राज चाहते हैं।  लेकिन अब दोनों देशों की ओर से आ रहे बयान उनके कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा में ले जा सकते हैं दोनो देश एक दूसरे का बहिष्कार करने की अपील कर रहे है। 

बता दें कि यूएई के इसराइल के साथ हाल ही में हुए सौदे के जवाब में राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोआन ने तुर्की के साथ संयुक्त अरब अमीरात के राजनयिक संबंधों को खत्म कर दिया है। एक खास खबर पर छपी खबर के मुताबिक अर्दोगान ने संवाददाताओं से कहा है कि इसराइल के साथ संयुक्त अरब अमीरात का विवादास्पद समझौता समस्याग्रस्त है और तुर्की फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता में खड़ा है।

साथ ही एर्दोगान ने आगे कहा कि, “मैंने अपने विदेश मंत्री को आवश्यक निर्देश दिए हैं। हम या तो राजनयिक संबंधों को निलंबित कर सकते हैं या अपने राजदूत को वापस बुला सकते हैं क्योंकि हम फिलिस्तीनी लोगों के साथ खड़े हैं और हमेशा समर्थन का वादा करते है।

तुर्की की जनरल असेंबली में राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा था कि खाड़ी के कुछ देश तुर्की को निशाना बना रहे हैं और उन नीतियों का पालन कर रहे हैं, जिससे अस्थिरता आ सकती है।इसके बाद उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “यह नहीं भूलना चाहिए कि जो देश आज सवालों के घेरे में हैं वह कल तक अस्तित्व में ही नहीं थे और शायद वह कल मौजूद न हों. हालाँकि, अल्लाह की सहमति से हम इस क्षेत्र में हमेशा अपना झंडा फ़हराते रहेंगे।” अर्दोआन के इस बयान को सीधे तौर पर सऊदी अरब से जोड़कर देखा गया, जो साल 1932 में अस्तित्व में आया था।

वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के एक बयान के बाद सऊदी अरब के चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के प्रमुख ने तुर्की का हर तरह से बहिष्कार करने की अपील की है। काउंसिल ऑफ़ सऊदी चैंबर्स के चेयरमैन अजलान अल अजलान ने ट्वीट किया है, “हर सऊदी नागरिक चाहे वह व्यापारी हो या उपभोक्ता, उसकी ज़िम्मेदारी है कि वह तुर्की का हर तरह से बहिष्कार करे। चाहे वह आयात के स्तर पर हो, निवेश के स्तर पर या फिर पर्यटन के स्तर पर. यह सब हमारे नेता, हमारे देश और हमारे नागरिकों के ख़िलाफ़ तुर्की सरकार के निरंतर विरोध के जवाब में है।”

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