मध्य प्रदेश

वो 2-3 दिसम्बर की दरम्यानी रात..

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अभय कुमार —

दो खबरें क्षुब्ध करने वाली हैं. हैदराबाद में एक पशुचिकित्सक युवती के साथ दरिंदों ने बलात्कार कर उसे जिंदा जला दिया तो दूसरे मामले में झारखंड की राजधानी रांची में नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी में एक आदिवासी  छात्रा को अगवा कर उसके साथ अन्य छात्रों  ने सामूहिक बलात्कार किया. हैदराबाद की पशुचिकित्सक बेटी के साथ जो दरिंदगी हुई, उसे सुनकर भी रूह कांप जाती है. उसका दुर्भाग्य ही था कि रात के वक्त ड्यूटी से लौटते वक्त उसकी स्कूटी का टायर पंक्चर हुआ. मौके का नाजायज फायदा उठाते हुए एक ट्रक ड्राइवर और उसके साथियों ने युवती के साथ सामूहिक  बलात्कार किया और इस पाप पर पर्दा डालने के लिए उसकी हत्या कर लाश को आग लगा दी. साइबराबाद पुलिस ने इस मामले में शुक्रवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने शराब पीने के बाद महिला डॉक्टर को सात घंटे तक बंधक बनाए रखा और सामूहिक दुष्कर्म किया. सरकारी वेटरनरी डाॅक्टर युवती शादनगर में रहती थी और 30 किमी दूर शमशाबाद के वेटरनरी हास्पिटल में काम करती थी. रोजाना इस सफर का एक हिस्सा वह टू व्हीलर से और बाद में कैब से पूरा करती थी. लौटते में उसकी स्कूटी पंक्चर होने पर उसने अपनी बहन को फोन किया तो बहन ने उसे कैब से आने की सलाह दी. इसके पहले एक ट्रक ड्राइवर ने युवती को उसकी स्कूटी ठीक कराने का झांसा दिया. इसी बहाने वो और उसके  साथी युवती को साथ ले गए और अपना मुंह काला किया. इस बीच घरवाले युवती को तलाशते रहे. दूसरे दिन 30 किमी दूर युवती की जली हुई लाश मिली. इस घटना से विचलित युवती की मां ने कहा कि आरोपियों को भी इसी तरह जिंदा जला कर सजा दी जानी  चाहिए. इस बीच राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने पूरे मामले की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया है.
आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने कहा कि यह समिति दोषियों को सजा मिलने तक चैन से नहीं बैठेगी. उन्‍होंने हैदराबाद पुलिस से विस्‍तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है.

यह घटना दिल्ली की उस निर्भया कांड की याद दिलाती है, जिसमें बलात्कारियों ने युवती को अधमरा छोड़ दिया था. हैदराबाद के दरिंदे तो उससे भी नीच ‍निकले. उन्होंने बलात्कार के बाद युवती को जिंदा जला डाला ताकि वह अपने साथ हुई दरिंदगी की कहानी किसी को सुना न सके. इस घटना का मुख्य आरोपी ट्रक ड्राइवर अहमद  पाशा बताया जाता है. युवती के साथ जो हुआ, वह तो शर्मसार करने वाला था ही, उसके बाद पुलिस और तेलंगाना के गृहमंत्री ने जो किया और कहा वह और भी क्षुब्ध करने वाला है. बलात्कार पीडि़ता के परिजनों का कहना है ‍कि वो घंटों पुलिस के चक्कर काटते रहे. उन्हें एक थाने से दूसरे थाने दौड़ाया जाता रहा. जबकि परिजनों ने घटना की रात में ही पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी थी. परिजनो का कहना है कि अगर समय रहते पुलिस हरकत में आती तो शायद युवती की जान बच सकती थी. राज्य के  गृह मंत्री मोहम्मद महमूद अली ने इस घटना पर ज्ञान ‍िदया कि अफसोस की बात है कि डॉक्टर ने पढ़ी-लिखी होने के बावजूद अपनी बहन को फोन किया. अगर वह 100 नंबर पर कॉल कर देती तो वह ‘सेफ’ रहती. 100 नंबर पर फोन करने पर पुलिस तीन मिनट में पहुंच जाती है.
हैदराबाद की यह जघन्य घटना इस बात को काली स्याही से रेखांकित करती है कि तमाम कानूनों, दावों, सुरक्षा इंतजामों और जागरूकता अभियानों  के बाद भी देश में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं. पुरूषों का महिलाअों के प्रति रवैया अभी भी भोग्या का ही है. वो महिलाअोंको दबोचने का कोई मौका नहीं छोड़ते. यह किसी भी पतनशील समाज की निशानी है. ट्रक ड्राइवर और उसके हैवान साथियों ने शराब पीकर जो किया, उसकी सजा तो केवल सजा-ए-मौत ही हो सकती है. लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता और शर्म  की बात पुलिस का रवैया और राज्य के गृहमंत्री का बयान है. यह हकीकत है कि ज्यादातर ऐसे मामलों  में पुलिस का रवैया टालमटोल का होता है. उसकी रूचि उन मामलों में ज्यादा होती है, जिनसे पैसा कूटा जा सके. गुमशुदा युवती को खोजने में ऊर्जा खर्च करना भ्रष्ट पुलिस की प्राथमिकता में बहुत नीचे आता है. ऐसे मामलों में  परिवार की चिंता और आशंकाएं पुलिस को उतना विचलित नहीं करतीं. उधर राज्य के गृहमंत्री के जो कहा वह प्रबोधन के लिहाज भले ठीक हो, सरकार  की गहरी असंवेदनशीलता और संगदिली को दर्शाता है. यह समझना कठिन नहीं है ‍िक युवती को पुलिस पर सौ टका भरोसा होता तभी न वह पुलिस को फोन करती. वैसे भी मुसीबत में अमूमन हर व्यक्ति पहले परिजनों को सूचित करता है न कि पुलिस को. और युवती को जब दंरिदों ने दबोच लिया होगा तो उसके लिए पुलिस तो क्या भगवान से भी गुहार करना नामुमकिन था.
यहां सवाल यह है कि हमारा समाज आखिर कहां जा रहा है? हम सभ्य हो रहे हैं या हैवानों को भी पीछे छोड़ रहे हैं ? आंख का पर्दा भी अब पूरी तरह तार-तार हो चुका है. दुर्भाग्य से तकनीकी उन्नति के साथ मानवीय संवेदनाएं भी तेजी से मर रही हैं. आलम यह है कि स्कूटी पंक्चर होने से परेशान अकेली युवती की मदद करने के बजाए शैतान लोग उसके साथ बलात्कार की सोचते हैं. रांची में अकेली जा रही छात्रा को देखकर बाकी छात्र उसे पिस्तौल की नोंक पर अगवा कर उसके साथ रेप करके खुश होते हैं. यह सब क्या है? किस सोच और मानसिकता का परिचायक है? मानवीय नातों- रिश्‍तों का अब क्या मतलब रह गया है? लगता है हम उसी आदिम युग की अोर लौट रहे हैं, जब पुरूष मात्र नर और स्त्री केवल मादा हुआ करती थी. हवस और हैवानियत हर रिश्ते और जज्बात को नंगा कर देना चाहती है. ऐसी हैवानियत कि जिस पर शैतान भी शर्मा जाए.
हैदराबाद की डाॅक्टर युवती और रांची की छात्रा के साथ बलात्कार करने वाले आरोपियों को शायद कानून सजा भी देगा, लेकिन इस सवाल का जवाब हमे शायद ही मिले कि वो दिन कब आएगा, जब बेटियां बेखौफ घर से निकल सकेंगी. हैदराबाद की घटना में तो विडंबना यह है ‍जिस महिला डाॅक्टर को रेप कर मारा गया, वह पशुचिकित्सक थी. उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि पशुअों के इलाज का सिला उसे जानवरों से भी बदतर इंसानों से इस रूप में मिलेगा.

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