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गोपालगंज।। देव दीपावली आज, मां सिंहासनी में दीप दान की तैयारी पूरी

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मंदिर परिसर को इलेक्ट्रॉनिक लाइट से सजाया गया
✍मां की कृपा से मिलेगी शांति, समृद्धि, आरोग्यता व दारिद्रता
✍शाम 6.2 बजे से शुरू होगा दीप दान, मनोरम होगा दृष्य


गोपालगंज:- कार्तिक पूर्णिमा की शाम देव दीपावली मनाने की तैयारी पूरी हो गयी है. मंगलवार को बिहार के प्रमुख शक्तिपीठ थावे में मां सिंहासनी के दरबार में इस वर्ष सवा लाख घी व तेल के दीयों से जगमग होगा. इसके लिए थावे मंदिर प्रशासन की ओर से भव्य तैयारियां की गयी है. मंदिर समिति के सचिव अनुमंडल पदाधिकारी उपेंद्र कुमार पाल ने बताया कि मंदिर को इलेक्टॉनिक लाइटिंग से सजाया गया है. मंदिर परिसर को लाइटिंग से सजाया गया है. परंपरा के अनुरूप डीएम व एसपी स्वंय दीपदान करने के लिए मौजूद रहेंगे. देव दीपावली के लिए विन्ध्याचल के साधक डब्लू गुरू भी पहुंच चुके है. मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान कार्तिकेय का जन्म भी हुआ था. इस दिन मां के दरबार में दीप दान करने से ना सिर्फ शांति मिलेगी बल्कि समृद्धि, आरोग्यता व दारिद्रता भी समाप्त होता है. पुत्र प्राप्ति होती है. यह दीप जीवन में उजाला भरता है. आपका दान किया गया दीप धर्मशास्त्र के साथ वातावरण के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. ज्योतिषविद पं राजेश्वरी मिश्र की माने तो पूर्णिमा को त्रिपुर राक्षस के वध से प्रसन्न होकर देवता अपनी खुशी को दिखाने के लिए दीपक जलाते हैं. इसी वजह से इस दिन को देव दीपावली के रूप से मनाया जाता है.

देव दीपावली शुभ मुहूर्त-
देव दीपावली प्रदोष काल शुभ मुहूर्त – 12 नवंबर 2019 को शाम 5 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 04 मिनट तक
पूर्णिमा तिथि समाप्त – शाम 7 बजकर 04 मिनट तक 12 नवंबर 2019

आज दीप दन करने से प्रसन्न होते है पितर
मां विंध्यवासिनी के साधक डब्लू गुरू की माने तो पूर्णिमा के दिन देवालय में दीप दान करने से पितर भी प्रसन्न होते है. उनकी कृपा पूरे वर्ष बनी रहती है. थावे में देव दीपोत्सव में मंदिर के पूर्व कोषाध्यक्ष प्रेम केडिया, पत्रकार सुनिल तिवारी, संजय कुमार अभय, बासुंरी वादक महर्षि अनिल शस्त्री, पूर्व प्रमुख उधव यादव की भूमिका प्रमुख रही है. त्रिपुरासुर राक्षस ने वरदान पा कर तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था. इसके बाद सभी देवताओं ने भगवान शिव से उसका अंत करने के लिए कहा. भगनाव शिव ने सभी देवताओं के विनती के बाद त्रिपरासुर से युद्ध करके उसका अंत कर दिया. इसलिए देव दीपावली के दिन पूजा-अर्चना का विशेष महत्व दिया जाता है.