अंतराष्ट्रीय

पाकिस्तान व्यापारिक रिश्ता तोड़ अपना ही कर रहा नुक़सान

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अभय कुमार —

कश्मीर मसले पर मौजूदा तनाव से पहले तक पाकिस्तान और भारत के बीच व्यापारिक संबंध सामान्य थे। दोनों देशों के बीच दो सड़क मार्गों- लाहौर से वाघा और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से चीज़ों का आयात-निर्यात हो रहा था। इसके बाद भारत सरकार ने बीते सोमवार, पाँच अगस्त को अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने की घोषणा की और बहुत कुछ बदल गया।
भारत प्रशासित कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए को निष्प्रभावी किए जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने भारत से राजनयिक संबंध सीमित करने और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध को स्थगित करने का फ़ैसला किया है।
लेकिन अब सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान और भारत के बीच व्यापारिक संबंध इतने व्यापक और अहम हैं कि पाकिस्तान के व्यापारिक संबंध को स्थगित करने के फ़ैसले से भारत को परेशानी हो सकती है। और अगर नहीं तो इस फ़ैसले से फिर सबसे ज़्यादा नुक़सान किसका होगा?
पकिस्तान के एक सराकारी अधिकारी और व्यापारी, जो भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबधों को बहुत अच्छे से समझते हैं, उनका मानना है कि इन दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध सीमित हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेन-देन उनके कुल व्यापार का एक बहुत छोटा हिस्सा है।
पाकिस्तान और भारत के बीच व्यापार
वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र (आईटीसी) संयुक्त राष्ट्र और विश्व व्यापार संगठन के संयुक्त जनादेश के साथ मिलकर काम करता है।
आईटीसी ने एक स्पेशल ट्रेड मैप बना रखा है, जो दुनिया भर के 220 देशों के बीच होने वाले 5300 सामानों के लेन-देन का मासिक, तिमाही और सलाना ब्यौरा रखता है। किन्हीं दो देशों के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध से जुड़े आँकड़े भी यहां से प्राप्त किए जा सकते हैं।
अब अगर आईटीसी के आँकड़ों पर नज़र डालें तो साल 2018 में पाकिस्तान से भारत में निर्यात की गई चीज़ों का कुल मूल्य क़रीब 38.3 करोड़ अमरीकी डॉलर से अधिक था लेकिन यह पाकिस्तान के निर्यात का सिर्फ़ दो प्रतिशत ही था।
वहीं इसी दौरान क़रीब 2.06 अरब अमरीकी डॉलर का सामान भारत से पाकिस्तान गया। यह भारत के निर्यात का सिर्फ़ 0.1 फ़ीसदी है।
हालांकि पाकिस्तान में व्यापारी और ट्रेड-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार पर रोक लग जाने से कुछ चीज़ों की कमी तो ज़रूर होगी और इससे कुछ उद्योगों और उपभोक्ताओं को नुक़सान भी होगा।
कॉटन
पाकिस्तान यूं तो भारत से कई चीज़ें आयात करता है लेकिन इन सबमें सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण कॉटन है।
आईटीसी के मुताबिक़, साल 2018 में पाकिस्तान ने क़रीब 46.6 करोड़ डॉलर का कॉटन आयात किया। साल 2014 से 2018 के बीच यह चार फ़ीसदी से बढ़कर पाकिस्तान के कुल कॉटन आयात का 37 फ़ीसदी हो गया है।
नूर मोहम्मद कसूरी, पेट्रोलियम उत्पाद आयात करते हैं। वो पाकिस्तान-भारत बिज़नेस काउंसिल के अध्यक्ष हैं।
जनादेश से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध स्थगित हो जाने से पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री (कपड़ा उद्योग) को काफ़ी नुकसान होगा।
उन्होंने कहा, “कॉटन और टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी दूसरी चीज़ें भारत में आसानी से और कम दाम में मिल जाती हैं।” उन्होंने कहा कि भारत जो कुछ भी निर्यात करता है उसमें टेक्सटाइल का एक बड़ा हिस्सा होता है।
सीमेंट, जिप्सम और खनिज
अब बात उन चीज़ों की जो पाकिस्तान, भारत को निर्यात करता है। इसमें चूना पत्थर, सीमेंट, नमक, सल्फ़र और दूसरे खनिज शामिल हैं।
आईटीसी के मुताबिक़, साल 2018 में पाकिस्तान ने भारत को क़रीब 9.6 करोड़ अमरीकी डॉलर का सामान निर्यात किया। भारत इन चीज़ों का एक बड़ा ख़रीदार है।
पंजाब के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने जनादेश से कहा कि पंजाब के बहुत से हिस्से हैं जो खनिज लवणों के मामले में बहुत संपन्न हैं। जिसकी ख़पत भारत के हिस्से वाले पंजाब में है, ख़ासतौर पर सीमेंट निर्माण के लिए।
पाकिस्तान से भारत को निर्यात किए जाने वाले इन खनिजों के कारण स्थानीय उद्योग और व्यापार को भी बढ़ावा मिल रहा था और एक बाज़ार भी था। आईटीसी भी इस बात की पुष्टि करता है।
साल 2014 से 2018 के बीच, पाकिस्तान से भारत को निर्यात किए जाने वाले खनिज व्यापार में 17 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि चीन के निवेश से पाकिस्तान इस नुक़सान की भरपाई कर सकता है।
ऑर्गेनिक केमिकल
आईटीसी के मुताबिक़, कॉटन के बाद ऑर्गेनिक केमिकल वो दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है जिसे पाकिस्तान, भारत से आयात करता है। इसकी क़ीमत क़रीब 40.2 करोड़ से अधिक है। यह हर साल 15 फ़ीसदी बढ़ भी रहा था। पाकिस्तान की ऑर्गेनिक केमिकल की ज़रूरत का 15 फ़ीसदी हिस्सा भारत से पूरा होता है।
नूर मोहम्मद के मुताबिक़, पाकिस्तान भारत से दूसरे रसायन भी मंगाता है जिसका इस्तेमाल चमड़ा उद्योग, रंग-रौगन के लिए और दूसरे उद्योगों में करता है।
आईटीसी के मुताबिक़, पाकिस्तान ने साल 2018 में भारत से 10.8 करोड़ अमरीकी डॉलर मूल्य की वस्तुओं का आयात किया। यह पाकिस्तान में इन सामानों के आयात का 21 प्रतिशत है और यह सालाना पाँच प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
फल और सूखे मेवे
सीमेंट और अन्य खनिजों के बाद भारत जिन वस्तुओं का पाकिस्तान से आयात करता है, उनमें फल, सूखे मेवे, खट्टे फल और खरबूज शामिल हैं। साल 2018 में पाकिस्तान से भारत को निर्यात की गई इन चीज़ों की क़ीमत क़रीब 9.3 करोड़ अमरीकी डॉलर से अधिक थी।
पाकिस्तान भारत को क़रीब 2.3 करोड अमरीकी डॉलर मूल्य की चीनी और चीनी से बनी मिठाइयों का निर्यात भी करता है। साल 2018 में इन निर्यातों में साल-दर-साल 368 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, लेकिन यह दर पाकिस्तान के कुल निर्यात का पांच प्रतिशत थी।
सब्जियां
पाकिस्तान एक कृषि प्रधान देश होने के लिहाज़ से फल और सब्ज़ी के लिए आत्मनिर्भर है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, साल के कुछ महीनों में स्थानीय बाज़ार में मांग और आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए पाकिस्तान भारत से मौसमी सब्जियों से अलग सब्ज़ियां आयात करता है।
आईटीसी के आँकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान ने 2018 में भारत से 2.1 करोड़ डॉलर की सब्जियों का आयात किया। हालांकि आयात की दर केवल तीन प्रतिशत थी, जिसमें 52 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट भी रही।
इन पाँच तरह की वस्तुओं के अलावा, पाकिस्तान और भारत कई अन्य चीज़ों का भी व्यापार करते हैं। इनमें रबर, प्राकृतिक उपकरण, चाय और कॉफी, विभिन्न चीज़ों से निकला तेल, लोहा और इस्पात, साबुन और अन्य वस्तुएं शामिल हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार बहुत ज़्यादा नहीं है।
क्या दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ सकता है?
पाकिस्तान-इंडिया बिज़नेस काउंसिल के अध्यक्ष नूर मोहम्मद कसूरी का कहना है कि अगर पाकिस्तान और भारत के बीच व्यापार जारी रहता तो वह उम्मीद कर रहे थे कि आने वाले वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार क़रीब 10 अरब अमरीकी डॉलर तक हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में पाकिस्तान की मदद कर सकता है। दूसरी ओर, यदि पाकिस्तान आर्थिक क्षेत्रों और व्यापार के लिए आवागमन की सुविधा देता है, तो भारत मध्य एशियाई देशों में अपने व्यापार का विस्तार कर सकता है।
नूर मोहम्मद कसूरी का मानना है कि पाकिस्तान और भारत के बीच व्यापार का रुकना प्रतीकात्मक और राजनीतिक है। दोनों देशों के बीच व्यापार इतना कम है कि अगले तीन से चार महीनों तक यह ना भी हो तो दोनों देशों पर ज़्यादा असर नहीं होगा।
हालांकि वो यह ज़रूर कहते हैं कि उनकी और उनकी संस्था की योजना कुछ ऐसे क़दम उठाने की है जिससे भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़े।