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कर्नाटक अभी दूर है! सीएम गहलोत के केन्द्र सरकार पर सियासी हमले जारी?

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राणा विजय कुमार —

राजस्थान में कांग्रेस सरकार के विभिन्न फैसलों के विरोध में तो विपक्ष के स्वर कमजोर पडे़ हुए हैं, अलबत्ता सीएम अशोक गहलोत के केन्द्र सरकार पर सियासी हमले जारी हैं. इसरो वैज्ञानिकों के वेतन में कमी, आरटीआई जैसे मुद्दों पर उन्होंने केन्द्र सरकार को घेरा है. सीएम गहलोत ने ट्वीट किया- यह जानकर हैरानी है कि एनडीए ने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के वेतन में कटौती की है. ऐसे समय में जबकि उनकी कड़ी मेहनत और उपलब्धियों पर पूरे राष्ट्र को गर्व है, केन्द्र सरकार ने उनके वेतन को कम कर दिया है.

उन लोगों का सम्मान करना चाहिए, जो देश का गौरव बढ़ाते हैं. उल्लेखनीय है कि इसरो के वैज्ञानिकों के संगठन स्पेस इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इसरो चेयरमैन डॉ. के. सिवन को पत्र लिखकर मांग की है कि वे इसरो वैज्ञानिकों के वेतन में कटौती करने वाले केंद्र सरकार के आदेश को रद्द करने में उनकी मदद करें. एसईए का कहना है कि वेतन में कटौती होने से वैज्ञानिकों के उत्साह में कमी आएगी, इसलिए हम वैज्ञानिक, केंद्र सरकार के फैसले से बेहद हैरत में हैं, दुखी हैं.

इसी तरह आरटीआई के मुद्दे पर सीएम गहलोत का कहना हैं कि यह लोकतंत्र के लिए दुखद दिन है कि संसद ने आरटीआई एमेंडमेंट बिल पारित किया. एनडीए की जीत हुई लेकिन भारत की जनता ने एक प्रमुख अधिकार खो दिया, जिसकी मदद से वे राजनेताओं और अधिकारियों के बारे में जान सकते थे, क्योंकि आरटीआई को कमजोर किया गया है इसलिए पारदर्शिता के दिन चले गए है और सभी विसंगतियां छिपी रह सकती हैं. उधर, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी प्रदेश के मुद्दों के बजाय राष्ट्रीय मुद्दों पर ज्यादा फोकस हैं.

वसुंधरा राजे का कहना है कि लोकसभा में तीन तलाक बिल पारित होना मुस्लिम बहनों को सामाजिक संरक्षण प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम है. वर्षों से चले आ रहे इस अनाचार को खत्म करने के लिए पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री आरएस प्रसाद को बधाई तथा सभी सहयोगियों का आभार.

उनका कहना है कि तीन तलाक के मुद्दे को धर्म और सियासी चश्मे से देखने की बजाय इंसाफ और इंसानियत से देखा जाना चाहिए. यह बिल निश्चित तौर पर समाज में मुस्लिम महिलाओं का सम्मान बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, जिसका सभी को स्वागत करना चाहिए. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजनीतिक हवा का रूख इस वक्त सीएम गहलोत के पक्ष में इसलिए है कि एक तो सदन में संख्याबल के लिहाज से वे मजबूत हैं और दूसरा- विपक्ष की ओर से भी कोई प्रभावी विरोध दर्ज नहीं करवाया जा रहा है, मतलब…. राजस्थान में कर्नाटक अभी दूर है!