राजनीती

आयाराम-गयाराम की भीड़ में खोती जा रही है बीजेपी, ये कैसी सियासी उपलब्धियां हैं?

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अभय कुमार —

लोकसभा चुनावों में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, नतीजा? टीडीपी के छह में से चार राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी दामन थाम लिया है! सवाल यह है कि इसे सियासी सफलता माना जाए या फिर सिद्धान्तों की विदाई? क्या सिद्धान्तों के लिए पहचाने जाने वाली बीजेपी भी आयाराम-गयाराम की राजनीतिक भीड़ में खोती जा रही है?
खबर है कि… टीडीपी सांसदों ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को अपना इस्तीफा सौंपा था. इसके बाद बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इन्हें बीजेपी की सदस्यता दिलाई!
मजेदार बात यह है कि टीडीपी में यह उठापटक तब हुई है, जब पार्टी  प्रमुख चंद्रबाबू नायडू देश से बाहर हैं?
याद रहे, उच्च सदन में भारतीय जनता पार्टी बहुमत के संकट से जूझ रही है, जिसके कारण कई फैसलों पर प्रश्नचिन्ह लगे हैं? इस वक्त राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है, जहां बीजेपी के सर्वाधिक 71 सदस्य जरूर हैं, लेकिन बहुमत के लिए पर्याप्त नहीं हैं. आने वाले समय में कई राज्यसभा की सीटें खाली होंगी, लेकिन वहां भी अकेली बीजेपी के लिए बहुत ज्यादा संभावनाएं नहीं हैं, लिहाजा सियासी जोड़तोड़ के रास्ते बीजेपी बहुमत हांसिल करना चाहती है?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आयाराम-गयाराम राजनीति के दम पर तत्काल भले ही बीजेपी को फायदा हो, परन्तु ऐसे नेता कब तक बीजेपी के साथ बने रहेंगे?

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