केंसर में सहायक रामबाण दवा सीसम हो रहे लुप्त।

अमन सिन्हा 

गोपालगंज:- जिले के मांझा प्रखंड क्षेत्र के साथ ही जिले में शीशम के पेड़ काफी संख्या में आज से बिस वर्ष पूर्व किसानों और सरकार के द्वारा लगाया गया था। जिसका उयोग केंसर इलाज में किया जाता है। लगभग 10 वर्ष पूर्व केंसर का इलाज करने वाले सीसम में ही केंसर विमारी पकड़ लेने के कारण शीशम के पेड़ सुखते गए जो बचे थे। वो सुख रहे है ।किसान शीशम के पेड़ लगाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करते थे।एवं इसके लकड़ी को बेचकर न केवल कारोबार चलाते थे बलिक इससे अन्य कार्य भी करते थे, लेकिन विगत कुछ वर्षों से काफी संख्या में शीशम के पेड़ों के सूखने से किसानों की स्थिति दयनीय हो गई  है ।चाहे रेलवे स्टेशन तरफ का क्षेत्र हो या दियारे क्षेत्र के साथ साथ हर एक इलाकों में शीशम के पेड़ काफी संख्या में सुख गए हैं ।मधु सरैया गांव के शिवजी यादव ने बताया कि उन्होंने काफी संख्या में शीशम के पेड़ लगाए थे।जिससे उनके जलावन के साथ साथ अन्य कार्य भी होता था ।जिसके साथ साथ अन्य  फायदा होता था लेकिन विगत कुछ वर्षों से शीशम के पेड  तैयार होने के साथ सुख रहे है ।जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। परशुरामपुर के लक्ष्मी प्रसाद के साथ   बंगरा के मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने 10 कट्ठे में शीशम के पेड़ लगाए थे। हर साल काफी संख्या में  पेड़ सुख रहे है।  इससे किसानो की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। परन्तु सुख रहे शीशम के पेड़ को बचाने के लिए सरकार के द्वारा आवश्यक कदम नही उठाने  तथा वैज्ञानिकों  के द्वारा भी रोक थाम के लिए शोध नही करने से शीशम के पेड़ लुप्त होते दिख  रहे है ।एक समय था  कि सरकार के द्वारा नहर और सड़क के किनारे  शीशम के पेड़ अधिक लगवाए जाते थे। वही किसानों के द्वारा आर्थिक इस्थित को मजबूत करने के उद्देश्य एवम पर्यावरण को बनाये रखने के लिए शीशम आम  जामुन  सेखवा  के पेड़ लगते थे।  जिससे रेलवे के पटरी बनता था। किसान फर्नीचर का कार्य करते थे। परन्तु जब से शीशम सूखने की विमारी पकड़ने लगा तब से सरकार के द्वारा शीशम के पेड़ को बचाने का प्रयास न कर  कदम   के पेड़ लगाने का  कार्य जारी हो गया।